Kulfa Cultivation: कुल्फा की खेती से बंपर मुनाफा कमा सकते हैं किसान, यहां पढ़ें पूरी जानकारी

Kulfa ki kheti: कुल्फा की खेती सभी प्रकार की मिट्टी में की जा सकती है. इसकी खेती के लिए सबसे अच्छा मौसम मॉनसून का माना जाता है. किसान जुलाई और अगस्त के महीने में इसकी खेती कर बढ़िया मुनाफा कमा सकते हैं.

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Kulfa cultivation Kulfa cultivation

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 21 जुलाई 2022,
  • अपडेटेड 5:58 PM IST
  • इसकी खेती के लिए मॉनसून सबसे अच्छा मौसम
  • 4 से 6 हफ्ते में इस पौधे की कर सकते हैं कटाई

Kulfa Farming: कुल्फा की खेती को लेकर पहले किसान इतने जागरूक नहीं थे. लोगों को लगता था कि इसके पौधे कही भी खरपतवार के तौर उग आते हैं. फिर धीरे-धीरे लोगों को इसके औषधीय गुणों के बारे में पता चला, तब से किसानों ने इस पौधे की भी व्यवसायिक तौर पर खेती करनी शुरू कर दी है.

औषधीय गुणों से भरपूर
कुल्फा को औषधीय पौधों की सूची में भी शामिल किया गया है. इसकी पत्तियां और फल एंटीऑक्सीडेंट्स और कैरेटिनोइड्स का अच्छा स्रोत हैं. बता दें कि इसके फल में राइबोफ्लेविन, पाइरिडोक्सिन, फोलेट और नियासिन, आयरन, मैग्नीशियम और कैल्शियम जैसे मिनरल्स पाए जाते हैं, जो शरीर के लिए बेहद फायदेमंद होते हैं.

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किसी भी प्रकार की मिट्टी में की जा सकती है इसकी खेती
कुल्फा की खेती सभी प्रकार की मिट्टी में की जा सकती है. इसकी खेती के लिए सबसे अच्छा मौसम मॉनसून का माना जाता है. किसान जुलाई और अगस्त के महीनें में इसकी खेती कर बढ़िया मुनाफा कमा सकते हैं.

कैप्सूल के आकार के होते हैं इसके फल
बता दें कि कुल्फा की पत्तियां आकार में बेहद गोल होती है. इसके फूल पीले रंग के होते हैं. ये फूल आगे चलकर फल में तब्दील हो जाते हैं. इनका आकार कैप्सूल की तरह दिखता है. बता दें कि इस पौधे के लिए गर्म जलवायु सबसे ज्यादा उपयुक्त होता है, लेकिन ज्यादा ठंड मौसम में इसके पौधे जीवित नहीं रह पाते हैं. 

6 हफ्तों में कटाई के लिए तैयार
बीज लगाने के बाद अनुकूल मौसम व वातावरण होने पर कुल्फा के बीज 4 से 10 दिन के अन्दर अंकुरित हो जाते हैं. बीज लगाने के लगभग 1 महीने बाद या 4 से 6 हफ्ते के बाद इसके फल तैयार कटाई के लिए तैयार हो जाते हैं. बाजार में इसके फलों को बेच कर किसान बढ़िया मुनाफा कमा सकते हैं. औषधीय गुण होने की वजह से कई कंपनियां भी इसकी पत्तियां और फलों को किसानों से लेती है. इसके एवज में वे किसानों को बढ़िया पैसे देते हैं.

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