उत्तर प्रदेश सरकार काकोरी शहीद दिवस की 95वीं वर्षगांठ को भव्य तरीके से मनाने की तैयारी में है. 19 दिसंबर को प्रदेश के सभी शहीद स्थलों पर बड़े और भव्य कार्यक्रम आयोजित होंगे. साथ ही गोरखपुर में 750 ड्रोन के जरिए प्रदर्शनी भी शुरू होगी. उस प्रदर्शनी में ड्रोन के जरिए आसमान में शहीद महापुरुष दिखाए जाएंगे.
इसके अलावा लखनऊ के काकोरी स्थल पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद शामिल होंगे. वहां वो काकोरी घटना में शहीद हुए महापुरुषों को श्रद्धांजलि देंगे. बता दें कि काकोरी शहीदों की याद में गोरखपुर, अयोध्या, नैनी जेल व सहारनपुर में भी कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की गई है.
गोरखपुर में काकोरी के बलिदानियों को किया जाएगा याद
गोरखपुर में 19 दिसंबर की शाम पांच बजे रामगढ़ताल के सामने स्थित महंत दिग्विजयनाथ स्मृति पार्क में 750 ड्रोन के जरिए प्रदर्शन होगा. इसमें भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ केंद्रीय संस्कृति एवं विदेश राज्यमंत्री मीनाक्षी लेखी और प्रदेश सरकार के पर्यटन व संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह भी मौजूद रहेंगे.
यूपी सरकार मना रही काकोरी शहीद दिवस
बता दें कि काकोरी ट्रेन एक्शन के नायकों की याद में प्रदेश सरकार 15 से 19 दिसंबर तक काकोरी बलिदान दिवस समारोह मना रही है. 19 दिसंबर को ही अमर सेनानी पंडित राम प्रसाद बिस्मिल का बलिदान दिवस है. 1927 में इसी तिथि को उन्होंने गोरखपुर जेल में हंसते-हंसते फांसी के फंदे को चूमा था. 750 ड्रोन से होने वाले शो में उनकी शौर्य गाथा को याद कर उन्हें श्रद्धांजलि दी जाएगी. ड्रोन शो में गुरु गोरक्षनाथ की तपोभूमि पर प्रथम स्वातंत्र्य समर 1857 से लेकर आजादी की तारीख 15 अगस्त 1947 तक के विभिन्न घटनाक्रमों तथा इससे जुड़े क्रांतिवीरों का चित्रमय वर्णन किया जाएगा.
आखिर क्या था काकोरी ट्रेन एक्शन?
काकोरी ट्रेन एक्शन को हमेशा रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खां, राजेंद्र प्रसाद लाहिड़ी और अन्य कई क्रांतिकारियों के लिए जाना जाता है. तब हिंदुस्तान रिपब्लिक एसोसिएशन (HRA) से जुड़े क्रांतिकारियों ने इस एक्शन को अंजाम दिया था. ये एक्शन एक ट्रेन लूट से जुड़ा है, जोकि काकोरी से चली थी. आंदोलनकारियों ने इस ट्रेन को लूटने का प्लान बनाया था. जब ट्रेन लखनऊ से करीब 8 मील की दूरी पर थी, तब उसमें बैठे तीन क्रांतिकारियों ने गाड़ी को रुकवाया और सरकारी खजाने को लूट लिया.
19 दिसंबर को हुई थी फांसी
इस एक्शन में जो भारतीय क्रांतिकारी शामिल थे उन्हें 19 दिसंबर 1927 को फांसी दे दी गई थी. इसमें रामप्रसाद बिस्मिल, रोशन सिंह, अशफाक उल्लाह खां और राजेंद्र प्रसाद लाहिड़ी जैसे वीर शामिल थे.
आशीष श्रीवास्तव