जानें गुरु नानक देव ने क्यों की थी मक्का की यात्रा...

अपनी चौथी उदासी में गुरु नानक ने मक्का की यात्रा की. उन्होंने हाजी का भेष धारण किया और अपने शिष्यों के साथ मक्का पहुंच गए.

Advertisement
जब गुरु नानक ने की मक्का की यात्रा जब गुरु नानक ने की मक्का की यात्रा

प्रज्ञा बाजपेयी

  • नई दिल्ली,
  • 04 नवंबर 2017,
  • अपडेटेड 10:13 AM IST

गुरु नानक देव ने अपने शिष्य मरदाना के साथ करीब 28 वर्षों में दो उपमहाद्वीपों में पांच प्रमुख पैदल यात्राएं की थीं, जिन्हें उदासी कहा जाता है. इन 28 हजार किलोमीटर लंबी यात्राओं में गुरु नानक ने करीब 60 शहरों का भ्रमण किया. अपनी चौथी उदासी में गुरु नानक ने मक्का की यात्रा की. उन्होंने हाजी का भेष धारण किया और अपने शिष्यों के साथ मक्का पहुंच गए.

Advertisement

कई हिंदू, जैन और बौद्ध धर्म के कई तीर्थस्थलों की यात्रा करने के बाद नानक ने मक्का की यात्रा की थी.

गुरु नानक की मक्का यात्रा का विवरण कई ग्रन्थों और ऐतिहासिक किताबों में मिलता है. 'बाबा नानक शाह फकीर' में हाजी ताजुद्दीन नक्शबन्दी ने लिखा है कि वह गुरु नानक से हज यात्रा के दौरान ईरान में मिले थे. जैन-उ-लबदीन की लिखी 'तारीख अरब ख्वाजा' में भी गुरु नानक की मक्का यात्रा का जिक्र किया है. उन्होंने नानक और रुकुद्दीन के बीच संवाद का उल्लेख भी किया है. हिस्ट्री ऑफ पंजाब, हिस्ट्री ऑफ सिख, वारभाई गुरदास और सौ साखी, जन्मसाखी में भी नानक की मक्का यात्रा का जिक्र किया गया है.

गुरु नानक जी का एक शिष्य मरदाना था जो मुस्लिम था. मरदाना ने गुरु नानक से कहा कि उसे मक्का जाना है क्योंकि ऐसा माना जाता है कि जब तक एक मुसलमान मक्का नहीं जाता तब तक वह सच्चा मुसलमान नहीं कहलाता है. गुरु नानक ने यह बात सुनी तो वह उसे साथ लेकर मक्का के लिए निकल पड़े. गुरु जी मक्का पहुंचे तो वह थक गए थे और वहां पर हाजियों के लिए एक आरामगाह बनी हुई थी तो गुरु जी मक्का की तरफ पैर करके लेट गए.

Advertisement

हाजियों की सेवा करने वाला खातिम जिसका नाम जियोन था वह यह देखकर बहुत गुस्सा हुआ और गुरु जी से बोला, क्या तुमको दिखता नहीं है कि तुम मक्का मदीना की तरफ पैर करके लेटे हो. तब गुरु नानक ने कहा कि वह बहुत थके हुए हैं और आराम करना चाहते हैं. उन्होंने जियोन से कहा कि जिस तरफ खुदा ना हो उसी तरफ उनके पैर कर दे. तब जियोन को गुरू नानक की बात समझ में आ गई कि खुदा केवल एक दिशा में नहीं बल्कि हर दिशा में है. इसके बाद जियोन को गुरु नानक ने समझाया कि अच्छे कर्म करो और खुदा को याद करो, यही सच्चा सदका है.

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement