यूपी से मोदी को लड़ाने का कोई विचार नहीं: लक्ष्मीकांत बाजपेयी

यूपी बीजेपी के अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत बाजपेयी ने गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को उत्तर प्रदेश की किसी सीट से लोकसभा चुनाव लड़ाने की चर्चाओं पर विराम लगाते हुए ऐसी किसी संभावना से फिलहाल इनकार किया है. हालांकि वे कहते हैं कि मोदी के यूपी से चुनाव लडऩे पर पार्टी यहां की 80 लोकसभा सीटों में से 40 से ज्यादा जीत सकती है.

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लक्ष्मीकांत बाजपेयी लक्ष्मीकांत बाजपेयी

आशीष मिश्र

  • लखनऊ,
  • 18 अप्रैल 2013,
  • अपडेटेड 6:03 PM IST

यूपी बीजेपी के अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत बाजपेयी ने गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को उत्तर प्रदेश की किसी सीट से लोकसभा चुनाव लड़ाने की चर्चाओं पर विराम लगाते हुए ऐसी किसी संभावना से फिलहाल इनकार किया है. हालांकि वे कहते हैं कि मोदी के यूपी से चुनाव लडऩे पर पार्टी यहां की 80 लोकसभा सीटों में से 40 से ज्यादा जीत सकती है. चित्रकूट में डॉ. बाजपेयी ने प्रमुख संवाददाता आशीष मिश्र से अपनी योजना के बारे में बात की. बातचीत के अंश.

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पिछले विधानसभा चुनाव में हार के बाद प्रदेश कार्यसमिति की पहली बैठक से बीजेपी को क्या हासिल हुआ?
कार्यसमिति में आत्ममंथन हुआ. कमियां पता चलीं. अब पार्टी का पूरा जोर बूथ स्तर तक संगठन खड़ा करने पर होगा. बूथ पर कार्यकर्ता और जनता का बेहतर तारतम्य ही अगले चुनाव में अच्छे प्रदर्शन की राह खोलेगा.

प्रदेश में बीजेपी हर चुनाव में अपना जनाधार खोती जा रही है. पार्टी इसकी क्या वजह मानती है?
दो मुख्य क्षेत्र हैं जहां पर पार्टी बेहद कमजोर है. पहला, ग्रामीण इलाकों में पार्टी की पकड़ ढीली हुई है और दूसरा, दूसरी पार्टियों की जातिवादी राजनीति के कारण पिछड़ा वर्ग का मतदाता पार्टी से छिटक गया है. इन्हें दोबारा पार्टी से जोडऩे की रणनीति पर काम हो रहा है.

मंदिर आंदोलन के बाद सुस्त हुए कार्यकर्ताओं के बूते चुनाव कैसे जीतेंगे?
कार्यकर्ताओं में उत्साहहीनता ‘‘एक्स फैक्टर’’ के कारण है. राम मंदिर आंदोलन के बाद पार्टी का तेजी से जनाधार बढ़ा. संगठन में ऊपर से लेकर नीचे तक नए पदाधिकारी बने. समय के साथ ये पदाधिकारी भी हटे और दूसरों ने इनकी जगह ली. इस वजह से पूर्व (एक्स) पदाधिकारियों की काफी संख्या बीजेपी में है जो पार्टी में उपेक्षित महसूस कर रहे हैं. इन्हें दोबारा सक्रिय करना पड़ेगा. 

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मुसलमानों के बीच पार्टी का आधार बेहद कमजोर है. क्या इनके वोट लिए बगैर पार्टी अगले चुनाव में बेहतर प्रदर्शन कर सकती है?
बीजेपी को मुसलमानों का वोट नहीं चाहिए ऐसा मैं नहीं कहता. लेकिन मुसलमानों का वोट पाने के लिए ऐसा कोई काम नहीं किया जाएगा कि पार्टी कहीं की न रहे. 

लोकसभा के प्रत्याशी चुनने में इतनी देर क्यों हो रही है?
क्षेत्रीय दलों ने अपने उम्मीदवार उतारे हैं, लेकिन अब इन्हें बदला जा रहा है. बीजेपी ठोक-बजाकर एक बार प्रत्याशी घोषित करेगी जिसे बदलने की गुंजाइश न के बराबर रहेगी. 

लोकसभा चुनाव में पार्टी ने उत्तर प्रदेश से कितनी सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है?
हम तो अधिक-से-अधिक सीटें जीतने का प्रयास करेंगे. कार्यकर्ताओं से मिले फीडबैक के आधार पर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों में से बीजेपी 32 पर जीतने की स्थिति में है. अगर ‘मोदी फैक्ट’ आ गया तो यह आंकड़ा 40 पार कर जाएगा. 

क्या गुजरात के मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश की लोकसभा सीट से चुनाव लड़ेंगे?
नरेंद्र मोदी को उत्तर प्रदेश से चुनाव लड़ाने का पार्टी में किसी भी स्तर पर फिलहाल कोई विचार नहीं हो रहा. कुछ कार्यकर्ता व्यक्तिगत तौर पर ऐसी मांग कर रहे हैं. 

बीजेपी हिंदुत्व की बात करती है, लेकिन राम मंदिर के मुद्दे पर खामोश हो गई है. क्या अब यह मुद्दा नहीं रहा?
राम मंदिर मुद्दा नहीं, यह बीजेपी की आस्था का प्रतीक है. लोकसभा चुनावों में हम जनता से अपील करेंगे कि राम मंदिर का निर्माण कराने के लिए बीजेपी को केंद्र में बहुमत दें.

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