NCP ने भी मांगे थे 3 दिन, हालात देख राज्यपाल ने की राष्ट्रपति शासन की सिफारिश

महाराष्ट्र में सरकार गठन को लेकर 18 दिन तक चले खींचतान के बाद मंगलवार को राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया. बीजेपी और शिवसेना के बाद राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने एनसीपी को सरकार बनाने का न्योता दिया था, लेकिन उससे पहले ही राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया.

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एनसीपी नेताओं के साथ राज्यपाल कोश्यारी एनसीपी नेताओं के साथ राज्यपाल कोश्यारी

जितेंद्र बहादुर सिंह

  • नई दिल्ली,
  • 12 नवंबर 2019,
  • अपडेटेड 9:35 PM IST

महाराष्ट्र में सरकार गठन को लेकर 18 दिन तक चले खींचतान के बाद मंगलवार को राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया. बीजेपी और शिवसेना के बाद राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने एनसीपी को सरकार बनाने का न्योता दिया था, लेकिन उससे पहले ही राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया.

गृह मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक, एनसीपी ने मंगलवार सुबह राज्यपाल से संपर्क किया था और सरकार बनाने के लिए 3 दिन का समय मांगा था. हालांकि राज्यपाल का मत था कि कोई भी पार्टी ऐसे स्थिति में नहीं है कि वह सरकार बना सके.

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मंत्रालय के मुताबिक, राज्यपाल ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि चुनाव हुए 15 दिन हो गए, लेकिन कोई भी पार्टी सरकार बनाने की स्थिति में नहीं दिखी.

एनसीपी ने कहा-3 दिन और चाहिए

राजभवन ने एनसीपी को मंगलवार शाम 8:30 बजे तक सरकार बनाने का समर्थन जुटाने की बात कही और लेटर देने की बात कही थी. उससे पहले ही एनसीपी ने आखिर क्यों दिन में ही राजभवन जाकर यह कह दिया कि उसे 3 दिन का समय चाहिए. गृह मंत्रालय सूत्रों ने ये जानकारी दी है कि एनसीपी ने ऐसा लेटर राजभवन को दिया. उसके बाद महाराष्ट्र के गवर्नर ने अपनी पूरी रिपोर्ट बनाते हुए केंद्र सरकार को भेजी.

इसके बाद केंद्र सरकार ने कैबिनेट मीटिंग बुलाई और राष्ट्रपति शासन की सिफारिश की. इसी बीच एनसीपी के नेता नवाब मलिक यह कहते नजर आए कि उनके पास बहुमत है, उनको समय दिया जाना चाहिए. जब गवर्नर ने शाम 8:30 बजे तक का समय दिया था तो आखिर एनसीपी ने क्यों गवर्नर हाउस को लिखकर दिया कि उन्हें 3 दिन का समय दिया जाना चाहिए.

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गृह मंत्रालय ने कहा कि गवर्नर की रिपोर्ट कहती है कि उनकी तरफ से हर संभव कोशिश के बाद भी महाराष्ट्र की सरकार का गठन संविधान के मुताबिक नजर नहीं आ रहा है. ऐसे में राज्यपाल के पास राष्ट्रपति शासन की सिफारिश करने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है. उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 356 के मुताबिक यह अनुशंसा की है.

गृह मंत्रालय ने अपने बयान में क्या कहा

गृह मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि महाराष्ट्र के राज्यपाल का मानना था कि चुनावी प्रक्रिया समाप्त हुए 15 हो गए हैं और कोई भी राजनीतिक दल सरकार बनाने की स्थिति में नहीं है, इसलिए राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाना बेहतर होगा.

इससे पहले, रविवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कहा था कि वह अपने गठबंधन के साथी शिवसेना के रुख को देखते हुए महाराष्ट्र में सरकार गठन नहीं करेगी.

288 सदस्यीय विधानसभा में, भाजपा 105 सीट जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी और वह शिवसेना के साथ आसानी से सरकार बनाने की स्थिति में थी, लेकिन 56 सदस्यों वाली शिवसेना ने मुख्यमंत्री पद को लेकर मतभेद की वजह से भाजपा का साथ देने से इनकार कर दिया था.

उसके बाद से शिवसेना ने कांग्रेस और राकांपा की मदद से सरकार गठन करने का प्रयास किया. राज्यपाल ने सबसे पहले भाजपा को सरकार गठन के लिए आमंत्रित किया था, उसके बाद उन्होंने रविवार को शिवसेना को आमंत्रित किया. शिवसेना को हालांकि 24 घंटे की समयसीमा में पर्याप्त विधायकों का समर्थन हासिल नहीं हो सका.

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उसके बाद कोश्यारी ने सोमवार शाम को राकांपा को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया और समर्थन दर्शाने के लिए मंगलवार रात 8 बजे तक का समय दिया था, हालांकि उससे पहले ही राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया.

राज्यपाल के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट पहुंची शिवसेना

शिवसेना ने महाराष्ट्र के राज्यपाल के फैसले के खिलाफ सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. शिवसेना ने सरकार बनाने के लिए राज्यपाल द्वारा राकांपा व कांग्रेस से समर्थन पत्र लेने के लिए तीन दिन का समय नहीं दिए जाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है.

शीर्ष कोर्ट की रजिस्ट्री को इस पर अभी प्रधान न्यायाधीश से मंजूरी मिलनी बाकी है, जिससे मामले को सूचीबद्ध किया जा सके. बता दें कि शिवसेना राज्य में कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के समर्थन से गठबंधन सरकार बनाने का प्रयास कर रही है लेकिन वह दोनों दलों से समर्थन पत्र प्राप्त करने में विफल रही है.

महाराष्ट्र राज्यपाल का कदम राजनीति से प्रेरित : कांग्रेस

कांग्रेस ने महाराष्ट्र के राज्यपाल बीएस कोश्यारी के राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की अनुशंसा करने के कदम को राजनीति से प्रेरित बताया. पार्टी ने कहा कि राज्यपाल ने आमंत्रित दलों को पर्याप्त समय नहीं दिया और सभी दलों को आमंत्रित करने के बावजूद उन्होंने कांग्रेस को सरकार बनाने का आमंत्रण नहीं दिया.

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कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने ट्वीट में कहा, 'राज्यपाल कोश्यारी ने महाराष्ट्र में लोकतंत्र का अपमान किया और राष्ट्रपति शासन की अनुशंसा करके संवैधानिक प्रक्रिया का मजाक उड़ाया है.'

उन्होंने कहा, 'महाराष्ट्र में अकेली सबसे बड़ी पार्टी की अनुपस्थिति में, राज्यपाल को पहले सबसे बड़े चुनाव पूर्व गठबंधन भाजपा-शिवसेना को एकसाथ और उसके बाद दूसरे सबसे बड़े गठबंधन कांग्रेस-राकांपा को बुलाना चाहिए था.'

सुरजेवाला ने कांग्रेस को आमंत्रित नहीं करने के लिए भी राज्यपाल पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा, 'अगर राज्यपाल ने व्यक्तिगत दलों को बुलाया भी, तो उन्होंने कांग्रेस को क्यों नहीं बुलाया? राष्ट्रपति शासन लगाने से पहले समय देने में गड़बड़ी क्यों की गई. भाजपा को 48 घंटे, शिवसेना को 24 घंटे और राकांपा को 24 घंटे भी नहीं. यह कदम राजनीति से प्रेरित है.'

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