वर्ल्ड बुक फेयर 2018 शुरू, पहले दिन ये रहा खास

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में विश्व पुस्तक मेले का आगाज हो चुका है. ठंड के बावजूद बड़ी तादाद में पुस्तक प्रेमी मेला परिसर पहुंचे. इस साल पर्यावरण संरक्षण के संदेश के साथ पुस्तक मेले का शुभारंभ हुआ है.

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फाइल फोटो फाइल फोटो

मोहित पारीक

  • नई दिल्ली,
  • 07 जनवरी 2018,
  • अपडेटेड 11:54 AM IST

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में विश्व पुस्तक मेले का आगाज हो चुका है. ठंड के बावजूद बड़ी तादाद में पुस्तक प्रेमी मेला परिसर पहुंचे. इस साल पर्यावरण संरक्षण के संदेश के साथ पुस्तक मेले का शुभारंभ हुआ है. प्रगति मैदान में होने वाले इस मेले में इस बार 1500 स्टॉलों के साथ 800 प्रकाशक हिस्सा ले रहे हैं. पहले दिन की शुरुआत में लोगों की भीड़ सुबह कम रही, लेकिन बाद में बड़ी संख्या में लोग विविध किताबों का आनंद उठाने के लिए एकत्रित होने लगे.

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वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए मेले के उद्घाटन करते हुए केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि जिस तरह जीवन जीने के लिए भोजन चाहिए, थकान दूर करने के लिए विश्राम चाहिए, ठीक उसी तरह जिंदगी क्यों जिएं और कैसे जिएं, इसके लिए पुस्तकें चाहिए. पुस्तकें इंसान के जीवन का उन्नयन करती हैं.

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उन्होंने बताया कि मेले में यूरोपीय संघ के 35 लेखक भाग ले रहे हैं जो पुस्तक-प्रेमियों से बातचीत करेंगे. इस साल के पुस्तक मेले के सम्मानित अतिथि देश यूरोपीय संघ है. वहीं विशिष्ट अतिथि, पर्यावरणविद् सुनीता नारायण ने मेले की थीम पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि जलवायु परिवर्तन का सबसे अधिक प्रभाव भारत के गरीब और छोटे किसानों पर पड़ रहा है. इस विषय पर अनेक कार्यशालाएं, संगोष्ठियां तो आयोजित हो रही हैं परंतु आवश्यकता है उनके कार्यान्वयन की.

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राजकमल प्रकाशन के स्टॉल पर यशस्वी कवि केदारनाथ सिंह ने अपनी पुस्तक 'प्रतिनिधि कविताएं' में से कुछ कविताएं पाठकों को सुनाईं और उनसे बातचीत की. साहित्य अकादेमी पुरस्कार विजेता कवि ने कहा कि कविताओं की दुनिया एक ऐसी दुनिया है, जिसमें रंग, रोशनी, रूप, गंध, दृश्य एक-दूसरे में खो जाते हैं, पर यही दुनिया है, जिसमें कविता का 'कमिटमेंट' खो जाता है.

इस बार भी पाकिस्तान की किताबें दिखाई देंगी. एनबीटी की निदेशक रीता चौधरी का कहना है कि पाकिस्तान की किताबों की अच्छी मांग है. पाठक हमेशा पाकिस्तानी लेखकों की किताबें पसंद करते हैं. इसलिए इस साल प्रकाशक लौटे हैं. भले ही एक ही प्रकाशक हो लेकिन यह अच्छा संकेत है.

 

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