e-एजेंडा: योगी आदित्यनाथ बोले- कांग्रेस ने आपदा में भी बसों के नाम पर किया फर्जीवाड़ा

मोदी सरकार 2.0 का एक साल पूरा हो चुका है. इस मौके पर आयोजित आजतक के खास कार्यक्रम e-एजेंडा में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी शिरकत की. योगी आदित्यनाथ ने e-एजेंडा आजतक के 'डबल इंजन सरकार... कितना असरदार' सत्र में भाग लिया और अपनी राय रखी.

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यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (फाइल फोटो) यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (फाइल फोटो)

aajtak.in

  • लखनऊ,
  • 30 मई 2020,
  • अपडेटेड 7:44 PM IST

  • मोदी सरकार 2.0 का एक साल, आजतक पर e-एजेंडा कार्यक्रम का आयोजन
  • e-एजेंडा आजतक में यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी लिया हिस्सा

मोदी सरकार 2.0 का एक साल पूरा हो चुका है. इस मौके पर आयोजित आजतक के खास कार्यक्रम e-एजेंडा में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी शिरकत की. योगी आदित्यनाथ ने e-एजेंडा आजतक के 'डबल इंजन सरकार... कितना असरदार' सत्र में भाग लिया और अपनी राय रखी.

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सत्र के दौरान यूपी में हुए बस विवाद से जुड़े मुद्दे पर बात करते हुए सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा इससे बड़ा फ्रॉड और फर्जी तरीका कोई और नहीं हो सकता है. देश ने एक बार फिर कांग्रेस के फर्जीवाड़े को देखा है. मुझे अफसोस है कि आपदा के समय में भी कांग्रेस को फर्जीवाड़ा करने में शर्म नहीं आई. यानी जहां पर एक-एक कामगार की सकुशल और सुरक्षित वापसी आवश्यक थी वहां पर आपने देखा होगा कि 294 बसें ऐसी थीं जिनका फिटनेस नहीं था या फिर इंश्योरेंस नहीं था या फिर दोनों ही नहीं थे.

योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस पर हमला जारी रखते हुए कहा कि 67 ऐसे नंबर थे जो न बस के थे न थ्री व्हीलर के. 68 ऐसे नंबर थे जिनके रजिस्ट्रेशन का कहीं पता ही नहीं था. 31 नंबर बस के दिए गए थे जो टेम्पो के निकले. ये कैसा मजाक था. ये भद्दा मजाक था. किसी के जीवन से ऐसा खिलवाड़ नहीं होना चाहिए था. ऐसे समय में राजनीति बिलकुल नहीं होनी चाहिए थी. लेकिन कांग्रेस ने दुस्साहस किया, उसने मजदूरों के जीवन के साथ खेलने का दुस्साहस किया है. मुझे लगता है कि इसके लिए उनका ये अक्षम्य अपराध स्वीकार नहीं होना चाहिए और इस कृत्य के लिए कांग्रेस को देश से माफी मांगनी चाहिए.

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कोटा में गई यूपी की बसों के फिटनेस सर्टिफिकेट नहीं मांगने के मुद्दे पर योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राजस्थान की सरकार ने जब उन बच्चों को भेजने की बात कही तो हमने पहले कहा कि बच्चों को यूपी के बॉर्डर तक भिजवा दीजिए. उन्होंने अपनी असमर्थता व्यक्त की. उन्होंने उसमें भी गलत आंकड़े दिए थे. उन्होंने हमें साढ़े चार हजार के आंकड़े दिए थे लेकिन बच्चे थे वहां पर 12 हजार. हमने अपने परविहन निगम की बसें यहां से वहां भेजी थीं. परिवहन निगम की बसें वहां पर कम पड़ीं तो वहां से और बच्चों को लाने के लिए और बसें भेंजीं. फिर भी हमें 70 बसें कम पड़ रही थीं क्योंकि बसों में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन भी करना था.

योगी आदित्यनाथ ने अपनी बात जारी रखते हुए आगे कहा कि ऐसे में हमने 70 बसें राजस्थान परिवहन की लीं. उन 70 बसों से भी उन्होंने बच्चों को केवल उत्तर प्रदेश की सीमा तक छोड़ने में सहयोग किया. लेकिन पहले उन्होंने 19 लाख रुपये तेल का पैसा लिया बाद में उन्होंने 36 लाख रुपये बसों का किराया भी मांगा. यही कांग्रेस की असलियत है. बाद में जिन बसों को वे अपनी बसें कह रहे थे ये वही राजस्थान परिवहन की बसें थीं जिनका किराया वो पहले ही हमसे वसूल कर चुके थे. कांग्रेस की कथनी और करनी देश की जनता जान गई है. इसलिए 2014 में, 2017 में, 2019 में देश की जनता ने और उत्तर प्रदेश की जनता ने उन्हें सबक सिखाया है. आगे भी मुझे लगता है कि इस प्रकार का सबक देश की जनता उन्हें सिखाती रहेगी.

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पीएम मोदी ने अपील की थी कि जो जहां पर हैं वहीं रहें इसके बावजूद लॉकडाउन में आपने बच्चों को वापस लाने का फैसला लिया उसके बाद हर राज्य यही करने लगा. इस सवाल के जवाब में यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यह हमारे लिए एक संवेदनशील मुद्दा था. हमारे 12 हजार बच्चे कोटा में फंसे थे जबकि 15 हजार बच्चे प्रयागराज में ही फंसे थे. इनको उनके घर तक पहुंचाने का निर्णय बहुत ही महत्वपूर्ण निर्णय था. क्योंकि कोटा में जो बच्चे थे वो 16 से 18 वर्ष के थे और अगर कोई भी बच्चा कोई गलत निर्णय ले लेता तो बहुत बड़ा कलंक लगता.

सीएम योगी ने आगे यह भी कहा कि हमने इस बारे में केंद्रीय गृह मंत्री से बात की थी. उन्होंने सहमति जताई थी लेकिन कहा था कि सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया जाना चाहिए. उसके बाद ही कोटा से और प्रयागराज से बच्चों को निकाला. इसके बाद मजदूरों को वापस लाने और बाहरी राज्यों के जो लोग यहां फंसे थे उन्हें यूपी परिवहन की बसों से गंतव्य तक ले जाने का काम किया गया.

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