दिल्ली: स्कूलों में सफाई करके बच्चे सीखेंगे स्वच्छता का पाठ

दिल्ली के स्कूलों में सफाई के लिए सरकार ने राजधानी के सरकारी और प्राइवेट स्कूलों के प्रधानाचार्यों, शिक्षकों और बच्चों से इस बारे में सुझाव मांगा है. सुझाव में ये भी बताना है कि इस पाठ्यक्रम को विकसित करने में क्या-क्या गतिविधियां शामिल की जानी चाहिए और क्या-क्या गतिविधियां शामिल नहीं की जानी चाहिए.

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स्वच्छ विद्यालय पुरस्कार कार्यक्रम के दौरान मनिष सिसोदिया स्वच्छ विद्यालय पुरस्कार कार्यक्रम के दौरान मनिष सिसोदिया

रोहित मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 12 दिसंबर 2018,
  • अपडेटेड 10:54 PM IST

दिल्ली सरकार अपने स्कूलों में बच्चों को सफाई का पाठ पढ़ाएगी.  इसके लिए दिल्ली के स्कूलों में सफाई को लेकर एक कोर्स चलाया जाएगा लेकिन यह कोर्स किताबी नहीं होगा यानी इसके लिए कोई अलग से पीरियड या फिर कोई किताब नहीं होगी, बल्कि यह पाठ एक्टिविटी आधारित होगा.

इसके लिए सरकार ने दिल्ली के सरकारी और प्राइवेट स्कूलों के प्रधानाचार्यों, शिक्षकों और बच्चों से इस बारे में सुझाव मांगा है. सुझाव में ये भी बताना है कि इस पाठ्यक्रम को विकसित करने में क्या-क्या गतिविधियां शामिल की जानी चाहिए और क्या-क्या गतिविधियां शामिल नहीं की जानी चाहिए.

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उप-मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने दिल्ली सचिवालय में आयोजित 'स्वच्छ विद्यालय पुरस्कार'  कार्यक्रम के दौरान इसकी घोषणा की. इससे बच्चे अपने स्कूलों की साफ-सफाई में भागीदार बन सकेंगे और उनके अंदर साफ-सफाई करने की आदत भी विकसित होगी.

शिक्षा मंत्री ने कहा कि अभी तक जो मॉडल है, उसमें स्कूलों में जो भी गन्दगी होती है, जो भी कूड़ा-करकट फैलता है, उसमें बच्चे भी भागीदार होते हैं लेकिन साफ सफाई में उनकी भागीदारी नहीं होती, इससे बच्चों के अंदर एक जागरूकता भी बढ़ेगी.

हर स्कूल में तकरीबन 3 से 4 हजार बच्चे और टीचर्स आते हैं. गंदगी फैलती है या धूल होती है. इस सबको साफ करने के लिए अलग से सफाई कर्मचारी होते हैं लेकिन बच्चों के ऊपर साफ-सफाई को लेकर कोई जवाबदेही नहीं होती. इसलिये दिल्ली सरकार इसके जरिये बच्चों के भीतर साफ-सफाई रखने के साथ-साथ साफ-सफाई करने की भी प्रवृति विकसित करेगी.

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दिल्ली के शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा, एक बार बच्चों को स्कूल में साफ-सफाई करने की आदत बन जाएगी, तो वे अपने घर में और अपने आस-पास भी इस प्रवृत्ति को अमल में लाएंगे. इसी उद्देश्य से यह पाठ्यक्रम लागू किया जाएगा.

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