कोरोना वायरस महामारी को हैंडल करने के तरीके और हॉन्गकॉन्ग में लोकतंत्र समर्थक आंदोलन को लेकर चीन पर दुनियाभर का दबाव बढ़ रहा है. इस स्थिति से परेशान चीनी सत्ता प्रतिष्ठान ने डिजिटल युद्ध छेड़ दिया है यानी समन्वित प्रोपेगेंडा फैलाने के लिए बड़ा क्रॉस-प्लेटफॉर्म नेटवर्क.
न्यूयॉर्क स्थित एक खुफिया फर्म ग्राफिका ने हाल ही में एक रिपोर्ट प्रकाशित की है. इसमें कहा गया है कि चीनी प्रतिष्ठान के लिए जो मुद्दे संवेदनशील हैं, उनको लेकर बीजिंग दुनियाभर में लोगों की राय प्रभावित करने के लिए यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर का इस्तेमाल कर रहा हो सकता है.
स्पैमोउफ्लाज ड्रैगन के शीर्षक के साथ ग्राफिका रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन ने बांग्लादेश से हैक किए गए अकाउंट्स को संपत्ति की तरह इंस्तेमाल किया. इसका अनुमोदन गूगल के थ्रेट एनालिसिस ग्रुप (TAG) ने भी किया.
मुख्य जमीन पर काम कर रहे सोशल-मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर अब ऐसे झूठे संदेशों की बाढ़ आ गई है कि भारतीय सैनिक चीनी क्षेत्र में घुसपैठ कर रहे हैं.
सोशल-मीडिया प्लेटफार्म्स पर भ्रामक चीनी प्रोपेगेंडा
1962 युद्ध के वीडियो क्लिप भी स्पष्ट रूप से चीन में राष्ट्रवादी भावनाओं को भड़काने के लिए प्रसारित किए जा रहे हैं.
इस हफ्ते के शुरू में, TAG ने पुष्टि की कि उसने 1,000 यूट्यूब चैनल हटा दिए हैं. समझा जाता है कि वो एक परिष्कृत प्रोपेगेंडा का हिस्सा थे, जो कि मार्च से चीन के स्टेट एक्टर्स की ओर से चलाया जा रहा था.
आपको बता दें कि चीन में गूगल और फेसबुक पर प्रतिबंध जारी है. चीन से संबंधित प्लेटफार्म्स जैसे कि TikTok का देश में सेंसर किया संस्करण ही चलता है. लेकिन भारत और शेष लोकतांत्रिक दुनिया में इसी प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल दुष्प्रचार के पसंदीदा माध्यम के तौर पर किया जाता है.
हाल ही में भारत सरकार ने TikTok को अपने कंटेंट को मॉडरेट करने के लिए कहा था. ये कदम ऐसी रिपोर्ट्स के बाद उठाया गया था कि प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल को कोरोना वायरस को लेकर गलत सूचनाएं फैलाने के लिए किया जा रहा है.
चीन संभवत: हांगकांग में पुलिस हिंसा को लेकर भी एक अलग इंटरनेशनल प्रोपेगेंडा नेटवर्क का इस्तेमाल कर रहा है.
चीन से जुड़े एक कैम्पेन में हाल में अन्य देशों की पुलिस की तस्वीरों को फोटोशॉप किया गया था. जिससे झूठा संदेश फैलाया जा सके कि वो हॉन्गकॉन्ग में चीनी कार्रवाइयों का समर्थन करते हैं.
aajtak.in