सरकार ने नए भारतीय पासपोर्ट के बारे में घोषणा करके विवाद को जन्म दे दिया है. विदेश मंत्रालय ने हाल ही ऐलान किया कि पासपोर्ट में अब आखिरी पेज नहीं होगा, जिसमें पासपोर्टधारक का पता, उसके अभिभावकों और जीवनसाथी के नाम होते थे. जिन आवेदकों के लिए आव्रजन जांच जरूरी है यानी जो दसवीं कक्षा पास नहीं हैं, उनके पासपोर्ट का कवर नारंगी रंग का होगा. इनके अलावा, राजनयिकों और अधिकारियों को छोड़कर, बाकी आम नागरिकों के पासपोर्ट नीले कवर वाले ही होंगे.
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को इस फैसले को 'पक्षपातपूर्ण मानसिकता' वाला बताने में दो दिन लग गए. पार्टी प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि इस कदम ने भाजपा के 'भगवा प्रेम' को उजागर कर दिया है और उन्होंने राहुल के भेदभाव वाले आरोप को दोहराया.
तेल समृद्ध अरब के खाड़ी देशों को जाने वाले प्रवासी श्रमिक वर्ग के लिए आव्रजन मंजूरी आवश्यक होती है. केरल के पूर्व मुख्यमंत्री ओमान चांडी ने इस फैसले की तीखी आलोचना करते हुए कहा कि नारंगी पासपोर्टधारक कामगारों के साथ उनके मेजबान हिकारत से पेश' आएंगे.
चांडी की आलोचना में कोई हैरानी नहीं क्योंकि केरल की अर्थव्यवस्था में काफी हिस्सा खाड़ी से आए धन का होता है. नारंगी पासपोर्ट जारी करना ऐसा है मानो सरकार ने विदेशी अधिकारियों को भारतीय नागरिकों के साथ भेदभाव करने की मंजूरी दे दी हो.
केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने सरकार से अपने फैसले को 'दुरुस्त' करने का आग्रह करते हुए कहा, ''दो रंग होने की वजह से ऐसी स्थिति पैदा हो जाएगी जिसमें दसवीं से कम की शिक्षा वालों को दूसरे दर्जे का नागरिक समझा जाएगा.''
आखिरी पेज हटाने का मतलब है कि पासपोर्ट का इस्तेमाल पते के प्रमाण के रूप में नहीं किया जा सकेगा. इसकी सिफारिश विदेश मंत्रालय और महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अधिकारियों की तीन सदस्यीय टीम ने की थी.
विदेश मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय विनियमन के मुताबिक सिर्फ मशीन से पढ़े जा सकने वाले यात्रा संबंधी दस्तावेज ही प्रामाणिक माने जाते हैं और अंतरराष्ट्रीय यात्रा से संबंधित सारी जरूरी जानकारियां पहले पेज पर होती ही हैं.
अधिकारियों के मुताबिक एकल अभिभावकों, गोद लिए बच्चों और पासपोर्ट में अपने पति का नाम दर्ज न करवाने की इच्छुक महिलाओं के साथ भेदभाव न हो, इसके लिए यह कदम उठाया गया है. पर पासपोर्ट के रंग के आधार पर भेदभाव के आरोप पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई.
विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि जिनके लिए आव्रजन जांच जरूरी है, कलर कोडिंग से उनके लिए पासपोर्ट बनाना और उसे अमल में लाना भी आसान हो जाएगा. हालांकि नए पासपोर्ट जारी करने की कोई निश्चित तारीख घोषित नहीं की गई है. पर विशेषज्ञों को पासपोर्ट प्रक्रिया को आसान बनाने का सरकारी दावा गले नहीं उतर रहा.
वहीं नॉन-रेजीडेंट भारतीयों के समूहों ने आखिरी पेज हटाने के फैसले पर घबराहट जताई है. उन्होंने तर्क दिया कि विदेश में भारतीय अपने घर का पता जैसे ब्यौरे के लिए सबसे विश्वसनीय प्रमाण के बतौर पासपोर्ट पर ही निर्भर रहते हैं.
कइयों ने हैरानी जाहिर की कि क्या आधार कार्ड को भी ऐसा ही आधिकारिक दर्जा मिलेगा? यह भी हैरानी भरा है कि आवेदन में दिए गए पते की पुष्टि के लिए पुलिस की जांच जरूरी होगी, तो फिर आखिरी पेज को जारी क्यों नहीं रखा जा सकता या फिर उसे ऐच्छिक क्यों नहीं बनाया जाता, ताकि पासपोर्ट का इस्तेमाल पते के प्रमाण के लिए भी जारी रखा जाए?
हालांकि बड़ी चिंता नारंगी पासपोर्ट को लेकर है. भारतीय घरेलू नौकरों और श्रमिकों के मानवाधिकार के मामलों में खाड़ी के देशों का रिकॉर्ड अच्छा नहीं है. बताया जा रहा है कि आव्रजन जांच और नारंगी पासपोर्ट से मानव तस्करी रुकेगी और शोषण से श्रमिकों का बचाव होगा. पर आव्रजन जांच से मानव तस्करी पर कोई असर नहीं पड़ता. वहीं नारंगी पासपोर्ट विदेश जाने वाले भारतीयों की बड़ी आबादी को दूसरे दर्जे के नागरिक में बदल देगा.
सुजीत ठाकुर / संध्या द्विवेदी