जब हरमनप्रीत के पिता को याद आई बचपन में गिफ्ट की वो पुरानी टी शर्ट

अपनी ताबड़तोड़ बल्लेबाजी से कंगारू गेंदबाजों के छक्के छुड़ाने वाली हरमनप्रीत कौर के जन्म होते ही उनके पिता हरमिंदर सिंह ने एक छोटी सी शर्ट अपनी प्यारी बिटिया के लिए खरीदी थी और इस शर्ट पर एक बल्लेबाज छपा हुआ था.

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हरमनप्रीत के पिता हरमिंदर हरमनप्रीत के पिता हरमिंदर

केशवानंद धर दुबे / सतेंदर चौहान

  • नई दिल्ली ,
  • 21 जुलाई 2017,
  • अपडेटेड 2:03 PM IST

आईसीसी महिला वर्ल्ड कप में अपनी ताबड़तोड़ बल्लेबाजी से कंगारू गेंदबाजों के छक्के छुड़ाने वाली हरमनप्रीत कौर के जन्म होते ही उनके पिता हरमिंदर सिंह ने एक छोटी-सी शर्ट अपनी प्यारी बिटिया के लिए खरीदी थी और इस शर्ट पर एक बल्लेबाज छपा हुआ था, जिसके नीचे लिखा हुआ था गुड क्रिकेट. शायद उनके मन में कहीं न कहीं बिटिया को एक क्रिकेटर बनाने की भावना रही होगी.

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पिता हरमिंदर को याद आई वो पुरानी टी-शर्ट

हालांकि हरमनप्रीत कौर के पिता हरमिंदर कहते हैं कि उस समय उन्होंने हरमन को क्रिकेटर बनाने के बारे में सोचा भी नहीं था. यहां तक की हरमिंदर ने भी कभी क्रिकेट नहीं खेला. लेकिन जब हरमन ने क्रिकेट खेलना सीखा और पूरी दुनिया में अपना जौहर दिखाया तो अचानक ही हरमिंदर सिंह को वह पुरानी टी-शर्ट आज फिर याद आ गई, जो उन्होंने हरमन के जन्म के समय खरीदी थी और जिसको आज तक उन्होंने संभाल कर रखा हुआ है.

पुरुष प्रधान समाज में लड़कों के साथ खेला क्रिकेट

हरमनप्रीत कौर का क्रिकेटर बनने का ही जुनून इतना आसान नहीं था. जितना आज उनके 171 रन बनाने पर हर कोई महसूस कर रहा है. दरअसल, आपको पहले पंजाब के उस छोटे से जिले मोगा के बारे में समझना होगा जिस पंजाब को कुड़ी मार यानी कि जहां पर बच्चियों को गर्भ में ही मार दिया जाता है. वहां पर एक लड़की का लड़कों के साथ मैदान में खेलना इतना आसान ही नहीं, बल्कि किसी चुनौती से कम नहीं था.

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परिवार ने अपना सब कुछ दांव पर लगाया

कई बार ऐसे भी मौके आए, जब हरमिंदर, हरमनप्रीत को लेकर ग्राउंड में पहुंचते तो आपस में लड़के एक-दूसरे को गाली देते थे. लेकिन हरमिंदर के दिमाग और दिल में एक जुनून था उन गलियों को किस तरीके से तालियों में बदलवाया जाए. यह शायद हरमिंदर सिंह के लिए उतना आसान नहीं था. जब  हरमन ने 115 बॉल पर 171 रन बनाए, तो पूरा देश उनकी वाहवाही कर रहा है. लेकिन यह भी सच है कि इस सफरनामे में एक परिवार ने अपना सब कुछ दांव पर लगाया था.

 

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