बलराम जयंती आज, जानें इस दिन क्यों जरूरी है भैंस के दूध का सेवन?

बलराम जयंती पर हल के उपयोग से तैयार फसल से बने व्यंजनों का सेवन नहीं किया जाता है. पसहर चावल यानि स्वयं उग आए चावलों की खीर बनाती हैं. पांच प्रकार की पत्तेदार सब्जियों से सब्जी बनाई जाती है.

इस दिन माताएं पुत्र की बल वृद्धि और दीर्घायु के लिए षष्ठी पूजा करती हैं.
अरुणेश कुमार शर्मा
  • नई दिल्ली,
  • 09 अगस्त 2020,
  • अपडेटेड 11:50 AM IST

भाद्रपद कृष्ण पक्ष की षष्ठी को बलराम जयंती मनाई जाती है. इसे हल षष्ठी, कमरछठ, हरछठ और चंद्रषष्ठी के रूप में मनाया जाता है. इस दिन हल और मूसल की पूजा की जाती है. बलराम जयंती पर भैंस के दूध का सेवन किया जाता है. भैंस के दूध से बने व्यंजनों का ग्रहण किया जाता है.

बलराम जयंती पर हल के उपयोग से तैयार फसल से बने व्यंजनों का सेवन नहीं किया जाता है. पसहर चावल यानि स्वयं उग आए चावलों की खीर बनाती हैं. पांच प्रकार की पत्तेदार सब्जियों से सब्जी बनाई जाती है. माताएं पुत्र की बल वृद्धि और दीर्घायु के लिए इस दिन षष्ठी पूजा करती हैं.

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भगवान बलराम श्रीकृष्ण के बड़े भाई हैं. माता देवकी ने कंस द्वारा छह संतानों के वध के दुखी होकर षष्ठी मां की पूजा की. इससे बलराम दीर्घायु और बलवान हुए. बलराम भारतीय संस्कृति में कृषि पालकों और पशु पालकों के प्रतिनिधि प्रतीक हैं. उनके जैसा बलवान और समर्थ पुत्र की इच्छा से माताएं षष्ठी मां की पूजा करती हैं. भैंस के दूध का प्रयोग से बनी चीजों से देवी पूजा करती हैं.

भारतीय संस्कृति में गाय सर्वश्रेष्ठ हैं. वे कामधेनु हैं. योगेश्वर श्रीकृष्ण गोपाल कहे जाते हैं. उतनी महत्ता भैंस की हमारी संस्कृति में है. उसका दूध बलवर्धक और वीर्य वर्धक है. यम देव का वाहन भैंसा है. इस प्रकार यह दीर्घायु का प्रतीक है. हल षष्ठी को सभी को भैंस के दूध का सेवन और स्वतः उग आई वनस्पति से तैयार व्यंजनों को ग्रहण करना चाहिए.

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