जानें, क्यों रखा जाता है सौभाग्य सुंदरी व्रत?

हिंदू धर्म में व्रत-पूजा का खास महत्व है. इनमें से एक है सौभाग्य सुंदरी व्रत. आइए जानते हैं आखिर क्यों रखा जाता है ये व्रत और क्या है इस व्रत की महिमा.

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प्रतीकात्मक फोटो प्रतीकात्मक फोटो

प्रज्ञा बाजपेयी

  • नई दिल्ली,
  • 23 जनवरी 2019,
  • अपडेटेड 9:40 AM IST

23 जनवरी बुधवार को सौभाग्य सुंदरी व्रत है. बुधवार को माघ मास की तृतीया तिथि है. सौभाग्य सुंदरी व्रत से महिला को संतान और अच्छे पति का सुख प्राप्त होता है. कन्याओं को मनचाहा पति मिलता है. कन्याओं की शादी अच्छे घर में हो जाती है. माघ मास की तृतीया तिथि को तीज की तरह ही मनाते हैं. तृतीया तिथि माता गौरी पार्वती की जन्म तिथि मानी जाती है. मान्यता है कि मां पार्वती ने घोर तपस्या कर शंकर जी को वर रूप में प्राप्त किया था. इसके बाद गणेश जी और कार्तिकेय जैसे दो बेटे प्राप्त हुए. तभी से अगहन तृतीया को सौभाग्य सुंदरी की व्रत पूजा होती है.

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इसमें महिलाएं और कन्याएं तीज की तरह सजती संवरती हैं. पूरे शिव परिवार की पूजा करती हैं. महिलाओं के इस व्रत पूजा से बहुत लाभ मिलता है. शिव परिवार की पूजा से घर में धन और ऐश्वर्या की कमी नहीं होती है. धन और अन्न से भंडार भरा रहता है. इसमें हर चीज 16-16 होती है.

कन्या और महिला क्या तैयारी करें-

- सुबह गंगा जल डालकर स्नान करें.

- व्रत शुरू करें और सोलह श्रृंगार करें.

- इस दिन कन्याओं और महिलाओं को मेहंदी लगानी चाहिए.

- इस दिन लाल साड़ी या लाल जोड़ा ही पहनें.  

- सजने संवरने में लाल, हरी चूड़ियां, काजल, बिंदी का भी प्रयोग करें. लाल चुन्नी भी ओढ़ें.

- शिव परिवार की पूजा करें. 

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