Shaniwar Vrat Katha: शनिवार का दिन शनिदेव को समर्पित है. शनिदेव को न्याय का देवता माना जाता है. कहा जाता है कि शनिदेव प्रत्येक व्यक्ति को उनके कर्मों के अनुसार फल देते हैं. शनि को कर्मफलदाता माना गया है. शनिदेव व्यक्ति को बुरे और अच्छे दोनों कर्मों के अनुसार फल प्रदान करते हैं. यदि किसी जातक की कुंडली में शनि देव की स्थिति बेहतर हो तो वह अपने जीवन में बहुत ही ज्यादा तरक्की करता है. वहीं दूसरी तरफ यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में शनि देव पीड़ित अवस्था में हो तो उस व्यक्ति को जीवन में बहुत सारे कष्ट झेलने पड़ते हैं. ऐसे में हर व्यक्ति कोशिश करता है कि उनके ऊपर शनिदेव की विशेष कृपा बनी रहे. आइए जानते हैं कि शनिवार की व्रत कथा.
शनिवार व्रत कथा
एक बार सभी नौ ग्रहों में इस बात को लेकर होड़ मची कि कौन सबसे बड़ा और ताकतवर ग्रह है. सभी ग्रह इस बात का निर्णय जानने के लिए राजा विक्रमादित्य के पास पहुंचे जो बहुत न्यायप्रिय थे. विक्रमादित्य ने नव ग्रहों की बात सुनी और नौ सिंहासन का निर्माण करवाकर उन्हें क्रम से रख दिया. वह नौ सिंहासन सुवर्ण, रजत, कांस्य, पीतल, सीसा, रांगा, जस्ता, अभ्रक और लौह से निर्मित थे.
राजा ने शर्त रखी कि इस सिंहासन पर सभी नव ग्रह अपने आप स्वेच्छा से विराजित हो जाएं. साथ ही, यह भी बताया कि जो ग्रह आखिर में सिंहासन पर बैठेंगे वो ग्रह सबसे छोटे कहलाएंगे. इस शर्त के कारण आखिर में शनि देव (शनिदेव के प्रसन्न होने के संकेत) ने सिंहासन ग्रहण किया और वह सबसे छोटे ग्रह माने गए. शनि देव इससे क्रोधित हो गए और राजा को सावधान रहने के लिए बोलकर नाराज होकर चले गए. शीघ्र ही राजा की साढ़े साती शुरू हो हुई. राजा का जंगल में भूखे-प्यासे भटकना शुरू हो गया.
राजा के साथ एक के बाद एक बुरा होता चला गया. एक समय आया जब राजा अपंग हो गया. तब शनि देव ने राजा को दर्शन दिए और राजा को अपने द्वारा दी गई चेतावनी का अहसास कराया. राजा ने शनि देव से क्षमा मांगी तब शनि देव ने राजा को साढ़े साती से मुक्ति का उपाय बताया. शनि देव ने राजा को शनिवार का व्रत रखने और इस दिन चींटियों को आटा खिलाने के लिए कहा. राजा ने ऐसा ही किया और धीरे-धीरे शनिदेव का क्रोध शांत हो गया. शनि देव प्रसन्न हुए. शनिदेव ने राजा के सभी कष्ट हर उन्हें जीवन के सारे भौतिक सुखों का आनंद दिया.
शनिवार पूजन विधि
शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए शनिवार का व्रत विधि-विधान से करना बहुत ही आवश्यक है. शनिवार के दिन सबसे पहले सुबह उठकर स्नान करने के बाद स्वच्छ कपड़े पहनना चाहिए. इसके बाद पीपल वृक्ष को जल अर्पित करें. फिर लोहे से निर्मित शनिदेव की प्रतिमा को पंचामृत से स्नान करवाएं. उसके बाद मूर्ति को चावलों से बनाए गए 24 दल के कमल पर स्थापित करें. उसके बाद काले तिल, फूल, धूप, तेल, काले वस्त्र आदि से शनिदेव की पूजा करें. पूजा करने के बाद शनिदेव के 10 नामों का स्मरण करना बहुत ही शुभ माना जाता है. फिर शनि मंत्रों का जाप करें.
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