Kajri Teej आज, पति की लंबी आयु के लिए महिलाएं रहती हैं निर्जला व्रत

कजरी तीज के दिन सुहागन महिलाएं पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखती हैं जबकि कुंवारी कन्याएं अच्छा वर पाने के लिए यह व्रत करती हैं. कजरी तीज को करवा चौथ से भी कठिन माना जाता है.

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आज देश भर में मनाई जा रही है कजरी तीज आज देश भर में मनाई जा रही है कजरी तीज

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 06 अगस्त 2020,
  • अपडेटेड 8:39 AM IST

देशभर में आज कजरी तीज का त्योहार मनाया जा रहा है. कजरी तीज हर साल भादो मास में कृष्ण तृतीया को मनाई जाती है. कजरी तीज को कजली तीज भी कहा जाता है. कई जगह इसे बूढ़ी तीज या सातूड़ी तीज के नाम से भी जाना जाता है. तीज का त्योहार साल में 3 बार मनाया जाता है. हरतालिका तीज, हरियाली तीज और कजरी तीज. यह त्यौहार उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान और बिहार में बहुत धूमधाम से मनाया जाता है. आसमान में घूमती काली घटाओं के कारण ही इसे ‘कजरी’ तीज कहते हैं.

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कजरी तीज की पूजा विधि

-इस दिन सुहागन महिलाएं पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखती हैं जबकि कुंवारी कन्याएं अच्छा वर पाने के लिए यह व्रत करती हैं.

- करवा चौथ की तरह यह व्रत भी निर्जल रहकर किया जाता है. हालांकि वे महिलाएं जो गर्भवती हैं इस दिन फलाहार कर सकती हैं.

- सबसे पहले नीमड़ी माता को जल, रोली और चावल चढ़ाएं. नीमड़ी माता को मेंहदी और रोली लगाएं.

- नीमड़ी माता को मोली चढ़ाने के बाद मेहंदी, काजल और वस्त्र चढ़ाएं. इसके बाद फल और दक्षिणा चढ़ाएं और पूजा के कलश पर रोली से टीका लगाकर लच्छा बांधें.

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- पूजा स्थल पर घी का बड़ा दीपक जलाएं और मां पार्वती और भगवान शिव के मंत्रों का जाप करें.

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- पूजा खत्म होने के बाद किसी सौभाग्यवती स्त्री को सुहाग की वस्तुएं दान करनी चाहिए और उनका आशीर्वाद लेना चाहिए.

- यह व्रत चांद को देखकर खोला जाता है. अगर चंद्रमा न दिखाई दे तो रात 11.30 बजे आसमान की ओर मुख करके चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोल लें.

- कई महिलाएं अगली सुबह ही व्रत खोलती हैं. इस दिन कजरी गीत गाने की विशेष परंपरा है. यूपी और बिहार में लोग ढोलक की थाप पर कजरी गीत गाते हैं.

कजरी तीज का महत्व

हरियाली तीज, हरतालिका तीज की तरह कजरी तीज भी सुहागन महिलाओं के लिए प्रमुख त्योहार माना जाता है. विवाहित महिलाएं ये व्रत पति की लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए करती हैं. माना जाता है कि इसी दिन मां पार्वती ने भगवान शिव को अपनी कठोर तपस्या से प्राप्त किया था. इस दिन संयुक्त रूप से भगवान शिव और पार्वती की उपासना करनी चाहिए. इससे कुंवारी कन्याओं को अच्छा वर प्राप्त होता है और सुहागिनों को सदा सौभाग्यवती होने का वरदान मिलता है.

श्रृंगार में मेहंदी और चूड़ियों का जरूर प्रयोग करना चाहिए. सायं काल शिव मंदिर जाकर भगवान शिव और मां पार्वती की उपासना करनी चाहिए. कजरी तीज पर जौ, गेहूं, चने और चावल के सत्तू में घी और मेवा मिलाकर तरह-तरह के पकवान बनाये जाते हैं. चंद्रोदय के बाद भोजन करके व्रत तोड़ते हैं.

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