Anant Chaturdashi 2022: कब है अनंत चतुर्दशी? जानें तारीख, महत्व और शुभ मुहूर्त

Anant Chaturdashi 2022 kab hai: अनंत चतुर्दशी व्रत का हिंदू धर्म में बड़ा महत्व है, इसे अनंत चौदस के नाम से भी जाना जाता है. इस व्रत में भगवान विष्णु के अनंत रूप की पूजा होती है. भाद्रपद मास में शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को अनंत चतुर्दशी कहा जाता है. इस दिन अनंत भगवान (भगवान विष्णु) की पूजा के पश्चात बाजू पर अनंत सूत्र बांधा जाता है.

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अनंत चतुर्दशी अनंत चतुर्दशी

मुदित अग्रवाल

  • नई दिल्ली,
  • 08 सितंबर 2022,
  • अपडेटेड 1:23 PM IST

Anant Chaturdashi 2022 kab hai: इस साल अनंत चतुर्दशी 9 सितंबर को पड़ रही है. भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को होने वाला अनंत चतुर्दर्शी का व्रत के दिन भगवान नारायण या विष्णु भगवान का पूजन किया जाता है. यह उपवास व्यक्ति को अभाव मुक्त और रोगमुक्त करता है. इस उपवास का विशेष महत्व है. भगवान गणेश का विसर्जन भी इसी दिन होता है. 

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अनंत चतुर्दशी शुभ मुहूर्त (Anant Chaturdashi 2022 shubh muhurat)

उदया तिथि के अनुसार, अनंत चतुर्दशी 9 सितंबर, शुक्रवार को मनाई जाएगी. अनंत चतुर्दशी का व्रत सुबह 06 बजकर 25 मिनट पर शुरू होगा और शाम 06 बजकर 07 मिनट तक सूर्यास्त तक रहेगा.  

अनंत चतुर्दशी पूजन विधि (Anant Chaturdashi 2022 pujan vidhi)

पंडित मनोज त्रिपाठी के मुताबिक, यह व्रत सुबह से शाम का होता है. इस व्रत में एकादशी की तरह अगले दिन का पारण नहीं होता है. प्रातः काल स्नान करके भगवान विष्णु के चतुर्भुज रूप का पूजन करें. इसके बाद एक धागे को कुमकुम, केसर और हल्दी से रंगकर अनंत सूत्र तैयार करें, इसमें चौदह गांठें लगी होनी चाहिए. इसे भगवान विष्णु की तस्वीर के सामने रखें. भगवान विष्णु और अनंत सूत्र की षोडशोपचार विधि से पूजा शुरू करें और भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें. पूजन के बाद अनंत सूत्र को बाजू में बांध लें. इसमें पूरे दिन फलाहार नहीं ले सकते हैं. इसमें सिर्फ शाम के समय ही नमक ले सकते हैं. इस व्रत का अपमान नहीं करना होता है. इस व्रत में भगवान विष्णु को चरणामृत चढ़ाएं. शाम को नारायण का पूजन करें. फलाहार बनाने के बाद सबसे पहले भगवान को भोजन कराएं. उसके पश्चात पूरे परिवार में प्रसाद बांटे. एक विशेष बात ध्यान रखें कि स्वयं भी किसी के घर का भोजन ना करें बल्कि किसी को अपने घर प्रसाद के रूप में भोजन कराएं. तभी आपको पुण्य प्राप्त होगा. 

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अनंत चतुर्दशी का महत्व (Anant Chaturdashi 2022 importance)

अनंत चतुर्दशी भगवान नारायण के पूजन का पर्व है. इस दिन ही भगवान विष्णु ने 14 लोकों यानी तल, अतल, वितल, सुतल, तलातल, रसातल, पाताल, भू, भुवः, स्वः, जन, तप, सत्य, मह की रचना की थी. इस दिन ही गणेश जी को विसर्जित करते हैं. जिन लोगों के रोग ठीक नहीं हो रहे हैं. उन लोगों को ये व्रत रखना चाहिए. परिवार में कोई भी इस व्रत को रख सकता है. चाहे पति के लिए पत्नी, पत्नी के लिए पति, पिता के लिए पुत्र यह व्रत कर सकता है. लोन की समस्या अगर आ रही है तो वह लोग भी अनंत चतुर्दशी का उपवास रख सकते हैं. कुछ समय में ही आप लोन मुक्त हो जाएंगे. अगर किसी के घर में क्लेश चल रहा है तो उन लोगों को अनंत चतुर्दशी के उपवास के बाद जायफल अपने हाथ से भगवान विष्णु को अर्पण करना चाहिए. उसके बाद उसे जल में प्रवाह या पीपल के पेड़ के नीचे रखने से घर का क्लेश समाप्त हो जाएगा.

अनंत चतुर्दशी की कथा (Anant Chaturdashi 2022 katha)

महाभारत की कथा के अनुसार कौरवों ने छल से जुए में पांडवों को हरा दिया था. इसके बाद पांडवों को अपना राजपाट त्याग कर वनवास जाना पड़ा. इस दौरान पांडवों ने बहुत कष्ट उठाए. एक दिन भगवान श्री कृष्ण पांडवों से मिलने वन पधारे. भगवान श्री कृष्ण को देखकर युधिष्ठिर ने कहा कि, हे मधुसूदन हमें इस पीड़ा से निकलने का और दोबारा राजपाट प्राप्त करने का उपाय बताएं. युधिष्ठिर की बात सुनकर भगवान ने कहा आप सभी भाई पत्नी समेत भाद्र शुक्ल चतुर्दशी का व्रत रखें और अनंत भगवान की पूजा करें.

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इस पर युधिष्ठिर ने पूछा कि, अनंत भगवान कौन हैं? इनके बारे में हमें बताएं. इसके उत्तर में श्री कृष्ण ने कहा कि यह भगवान विष्णु के ही रूप हैं. चतुर्मास में भगवान विष्णु शेषनाग की शैय्या पर अनंत शयन में रहते हैं. अनंत भगवान ने ही वामन अवतार में दो पग में ही तीनों लोकों को नाप लिया था. इनके ना तो आदि का पता है न अंत का इसलिए भी यह अनंत कहलाते हैं. अत: इनके पूजन से आपके सभी कष्ट समाप्त हो जाएंगे. इसके बाद युधिष्ठिर ने परिवार सहित यह व्रत किया और पुन: उन्हें हस्तिनापुर का राज-पाट मिला.
 

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