द टैटू ऑन माई ब्रेस्ट के लेखक रवि राय ने बताया- ICU से निकलकर कैसे लिखी किताब

फिल्म डायरेक्टर, लेखक, पटकथा लेखक रवि राय शनिवार को साहित्य आजतक के मंच पर पहुंचे. उन्होंने इस दौरान अपने करियर से जुड़े अनुभव साझा किए. इस दौरान उनकी नई किताब 'द टैटू ऑन माई ब्रेस्ट' पर चर्चा की. किताब लिखने के दौरान उन्हें गंभीर बीमारी से जूझना पड़ा.

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साहित्य आजतक के मंच पर डायरेक्टर और लेखक रवि राय साहित्य आजतक के मंच पर डायरेक्टर और लेखक रवि राय

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 02 नवंबर 2019,
  • अपडेटेड 8:24 AM IST

फिल्म डायरेक्टर, लेखक, पटकथा लेखक रवि राय शनिवार को साहित्य आजतक के मंच पर पहुंचे. उन्होंने इस दौरान अपने करियर से जुड़े अनुभव साझा किए. उन्होंने अपनी नई किताब 'द टैटू ऑन माई ब्रेस्ट' पर भी चर्चा की. किताब लिखने के दौरान उन्हें गंभीर बीमारी से जूझना पड़ा था. मेन्नेजाइट होने की वजह से 15 दिनों तक आईसीयू में रहे.आईसीयू से निकले तो कंधे में चोट लग गई और उसके बाद आंख की रोशनी कमजोर पड़ गई, लेकिन इतनी दिक्कतों के बाद भी उन्होंने अपनी किताब पूरी की.

रवि राय की किताब द टैटू ऑन माई ब्रेस्ट भारत-पाकिस्तान बंटवारे पर आधारित है. इसमें उन्होंने प्रेम कहानी के जरिये बंटवारे के दौर को बताने की कोशिश की है. उन्होंने बताया कि मैं टेलीविजन के लिए काम कर रहा था, उसी दौरान यह किताब लिखने का ख्याल आया.

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रवि राय ने बताया कि हम जब भी बंटवारे के बारे में बात करते हैं उनमें सिर्फ पंजाब और बंगाल होता है, लेकिन इसमें सिंध छूट जाता है. हमने आजतक सिंध के बंटवारे के बारे में नहीं सुना और न ही उन मुद्दों पर बात की. इस किताब की पृष्टभूमि में सिंध ही है. इस किताब की पृष्टभूमि में सिंधी परिवार की कहानी है. इसमें एक सिंधी लड़की की प्रेम कहानी है. साथ ही, आजादी के समय जितने आंदोलन हुए उन सभी का इस किताब में जिक्र है.

किताब के टाइटल के बारे में बताते हुए रवि राय ने कहा कि कोई भी जंग हो उसमें सबसे ज्यादा बच्चे और महिलाएं ही पीड़ित होती हैं. भारत-पाकिस्तान के बंटवारे के समय हैवानियत इतनी बढ़ गई थी कि लोग महिलाओं के प्राइवेट पार्ट्स तक काट देते थे और उनके प्राइवेट पार्ट्स पर मजहब आदि के नाम गोद दिए जाते थे. मेरी किताब की हिरोइन मां से पूछती है कि तुम्हारे सीने पर टैटू क्यों हैं? मां बताती है कि वो लड़की के पिता यानी अपने पति को बहुत प्यार करती है, इसलिए वो टैटू उसके नाम का है, और यही लाइन किताब का टाइटल बना है.

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इस सवाल पर कि अचानक से लेखन में कैसे आना हुआ, रवि राय ने बताया कि एक क्रिकेटर अगर क्रिकेट छोड़ देता है तो भी वह क्रिकेट को जीता रहता है. ऐसे ही फिल्म और सीरियल की दुनिया के बाद में मैंने इस किताब को लिखने के बारे में सोचा.

फिल्मकार आनंद एल. राय के बड़े भाई रवि राय ने बताया कि रांझणा फिल्म उस समय हिट हुई थी. इसी खुशी में पूरा परिवार हांगकांग घुमने गया. उसी दौरान मैंने आनंद को बताया कि चैनल वाले कहानी लिखने की बात कर रहे हैं. चैनल पर सीरियल लिखने से कुछ पैसे तो आ जाएंगे, लेकिन मैं चाहता हूं कि अपनी किताब लिखूं. मैं चाहता हूं कि मेरी भी किताब एयरपोर्ट की दुकान पर दिखे. आनंद ने कहा कि भइया लिखिए. क्योंकि किताब लिखने के लिए फ्री माइंड चाहिए.

रवि राय किताब लिखने के दौरान बहुत बुरी तरह से बीमार पड़े थे. अपनी बीमारी के बारे बताते हुए रवि राय ने कहा कि किताब लिखने के दौरान मुझे मेन्नेजाइटस हो गया. मेन्नेजाइटस भूलने की एक बीमारी है. न मैं अपनी बीवी को पहचान पा रहा था और न बेटी को पहचान रहा था और भाई को भी पहचान नहीं पा रहा था. मैं सारे काम कर रहा था लेकिन मेरी यादश्त चली गई थी.इस दौरान मैं आईसीयू में 15 दिन रहा. आईसीयू से निकले तो कंधे में चोट लग गई और उसके बाद आंख की रोशनी कमजोर पड़ गई, लेकिन इतनी दिक्कतों के बाद भी उन्होंने अपनी किताब पूरी की.

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