परिवार के साथ रहते हुए जिन लड़कियों को डबल बेड भी छोटा लगता है, वही लड़कियां पीजी में आकर रेलवे की सीट जितने चौड़े बेड पर सोना सीख जाती हैं. बाथरूम के लिए लाइन लगाना सीख जाती हैं. मन मारकर दूसरे का पसंदीदा सीरियल देखना सीख जाती हैं और साथ ही भांति-भांति के लोगों के साथ रहना सीख जाती हैं.
कई बार पीजी में रहना मजबूरी होती है तो कई बार जरूरत. आमतौर पर जो लड़कियां पीजी में रहती हैं वो नौकरी करने के लिए अपने घर छोड़कर आती हैं. कुछ पढ़ाई के लिए भी आती हैं. नौकरी करने वाली लड़की के मन में जहां दो पैसे बचाने की बात चलती है वहीं स्टूडेंट के लिए मां-बाप का बोझ कम करने की. ऐसे में ज्यादातर लड़कियां पीजी में रहना प्रिफर करती हैं. वहीं जरूरत की बात करें तो कई बार मां-बाप खुद ही बेटी को अलग रूम लेकर नहीं रहने देते. दूर बैठे मां-बाप को लगता है कि बच्ची अकेले रहेगी तो कुछ भी हो सकता है. पीजी में वॉर्डन या लैंडलॉर्ड तो रहेगा ही साथ ही कुछ दूसरी लड़कियां भी रहेंगी. ऐसे में अकेले रहने से बेहतर है कि बेटी कुछ लोगों के साथ रहे.
पर बीते दिनों दिल्ली के एक पीजी में जो कुछ हुआ, उसके बाद शायद पीजी भी दूर बैठे मां-बाप को सुरक्षित न लगे. मामला दिल्ली के एक पीजी का है. जहां ग्रेजुएशन करने वाली एक लड़की जब अपने पीजी पहुंची तो एक युवक पहले से ही वहां मौजूद था. उसने लड़की को देखते ही अपनी पैंट उतार दी और अश्लील हरकत करने लगा. लड़की ने भागकर खुद को एक कमरे में बंद कर लिया और लैंडलॉर्ड को फोन किया. लड़का फिर भी वहीं खड़ा रहा. जब लैंडलॉर्ड पहुंचे तो उन्होंने लड़के की पिटाई की और उसे भगा दिया. लड़की ने जब पुलिस कंप्लेंट की बात कही तो उन्होंने मना कर दिया. साफ है कि इसके पीछे उन्हें बदनामी का डर रहा होगा. लेकिन क्या ये लड़कियों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ नहीं है?
बहुत सी लड़कियां अपने घर छोड़कर नौकरी, पढ़ाई या फिर दूसरी जरूरतों की वजह से बड़े शहरों का रुख करती हैं. ऐसे में वो पीजी को ठिकाना बनाती हैं. इस तरह की घटनाएं वाकई डर पैदा करती हैं. ऐसे में बहुत जरूरी है कि आप अगर आप भी पीजी खोज रही हैं तो पीजी में रहना शुरू करने से पहले इन बातों की जांच-पड़ताल जरूर कर लें.
1. सबसे पहले आपने जिस इलाके में पीजी देखा है, उसके बारे में आस-पास के लोगों से पता करें. बातों-बातों में आपको उस पीजी के बारे में काफी कुछ पता चल जाएगा.
2. जब आप पीजी देखने जाएं तो वहां पर पहले से रह रही लड़कियों से बात जरूर करें. उनसे पूछें कि यहां रहते हुए उन्हें किन दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. आप चाहें तो किसी लड़की से उसका नंबर ले लें और तसल्ली से उससे बात करें.
3. लैंडलॉर्ड को ये पहले ही साफ कर दें कि ये लड़कियों का पीजी है और यहां किसी भी पुरुष का आना अलाउड नहीं है. चाहे वो उनका बेटा या उनका कोई करीबी ही क्यों न हो.
4. पीजी के बाथरूम, खिड़की और रोशनदान अच्छी तरह से चेक करें. पीजी में सफाई के लिए कौन आता है, खाना पकाने के लिए कौन आता है, मरम्मत के लिए कौन आता है...इन सारी बातों की डिटेल आपके पास भी होनी चाहिए.
5. लैंडलॉर्ड के साथ संबंध अच्छे होने चाहिए लेकिन बहुत अधिक पर्सनल बिल्कुल भी न हों और न ही उन्हें होने दें.
6. पीजी जिस इलाके में है वहां का माहौल भी जरूर चेक करें. आस-पास कैसे लोग रहते हैं, इसका असर भी आप पर पड़ेगा. ऐसे में ये जानना आपके लिए बहुत जरूरी है.
7. पीजी का पता अपने ऑफिस, स्थानीय रिश्तेदारों और परिवार वालों को जरूर दें. विश्वासपात्र दोस्तों को भी एड्रेस नोट कराएं. ताकि इमरजेंसी में
8. अगर आपका पीजी किसी सोसाइटी में है तो वहां की कमेटी के संपर्क में भी रहें. अपने मोबाइल में सभी जरूरी नंबरों को फास्ट डायल मोड पर सेव करें.
9. चौकन्ना रहना सबसे जरूरी है. पीजी में रहने वाली लड़कियों के साथ हंसी-खुशी रहें लेकिन उन्हें अपनी बहुत पर्सनल बातें कभी न बताएं.
भूमिका राय