खराब सेहत के संकेत इस उम्र से ही दिखने हो जाते हैं शुरू, वैज्ञानिकों ने दी चेतावनी

वैज्ञानिकों ने रिसर्च के माध्यम से बताया है यदि कोई इंसान धूम्रपान अधिक करता है, अत्यधिक शराब पीता है या कम फिजिकल एक्टिव रहता है तो उसके संकेत उसे 36 साल की उम्र में ही दिखने लगते हैं.

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रिसर्च के मुताबिक खराब हेल्थ के संकेत 36 साल की उम्र में ही दिखने शुरू हो जाते हैं. रिसर्च के मुताबिक खराब हेल्थ के संकेत 36 साल की उम्र में ही दिखने शुरू हो जाते हैं.

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 09 मई 2025,
  • अपडेटेड 11:19 AM IST

ऐसे कई लोग हैं जो अनहेल्दी लाइफस्टाइल जीते हैं जिसका परिणाम उन्हें आगे चलकर भुगतना होता है. नशा या फिर अल्कोहल का सेवन या नो फिजिकल एक्टिविटी वाले लोगों के लिए खतरा हो सकता है. हाल ही में हुई एक रिसर्च में शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि धूम्रपान, अत्यधिक शराब पीने और पर्याप्त एक्सरसाइज न करने के दुष्प्रभाव 36 साल की उम्र तक महसूस होने लगते हैं.

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रिसर्च के अनुसार, 30 से अधिक वर्षों तक लोगों पर नजर रखी गई थी जिसमें यह बात साबित हुई है. धूम्रपान से फेफड़े का कैंसर , हृदय और श्वास संबंधी समस्याएं होती हैं, जबकि एक्सरसाइज की कमी और अत्यधिक शराब पीने से कैंसर, स्ट्रोक, दिल का दौरा और समय से पहले मृत्यु जैसी समस्याएं होती हैं.

326 लोगों पर हुई रिसर्च

एनल्स ऑफ मेडिसिन में पब्लिश हुई नई रिसर्च में फिनिश यूनिवर्सिटी के एक्सपर्ट्स ने पाया कि 36 वर्ष की आयु के लोगों में भी खराब हेल्थ के संकेत दिख रहे हैं. टीम ने 326 लोगों पर तब नजर रखी जब वे 27 वर्ष के थे, तथा फिर जब वे 36, 42, 50 और 61 वर्ष के थे. (तब 206 लोगों को शामिल किया गया था).

लोगों के मानसिक स्वास्थ्य का आकलन डिप्रेशन के लक्षणों के आधार किया गया जब कि फिजिकल हेल्थ को ब्लड प्रेशर, कमर की परिधि, ब्लड शुगर, कोलेस्ट्रॉल और अन्य फैट के लेवल के आधार पर मेटाबॉलाइज जोखिम स्कोर बनाकर मापा गया.

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लोगों से पिछले वर्ष की तुलना में अपने स्वास्थ्य का मूल्यांकन करने के लिए भी कहा गया. डिप्रेशन के लक्षण और ओवरऑल साइकोलॉजिकल वेल-वीइंग को 1-4 के पैमाने पर मापा गया. अपने स्वास्थ्य का मूल्यांकन 1-5 के पैमाने पर किया गया तथा मेटाबॉलाइज जोखिम को 0-5 के पैमाने पर मापा गया.

प्रत्येक समय पर तीन जोखिमपूर्ण व्यवहारों का मूल्यांकन किया गया जिसमें धूम्रपान, अत्याधिक शराब पीना और फिजिकल एक्टिविटी की कमी यानी हफ्ते में एक बार से कम एक्सरसाइज करना था.

रिसर्च में क्या सामने आया
 
रिसर्च के परिणामों से पता चला कि यदि किसी व्यक्ति में किसी समय पर तीनों अस्वास्थ्यकर आदतें (धूम्रपान, अत्याधिक शराब पीना और फिजिकल एक्टिविटी की कमी) थीं तो उसका मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य उन आदतों में से किसी भी आदत में शामिल न होने की तुलना में अधिक खराब था. वहीं लंबे समय तक तीनों अस्वास्थ्यकर आदतें  का खराब स्वास्थ्य से और भी अधिक गहरा संबंध पाया गया.

यदि ऐसा हुआ तो डिप्रेशन के लक्षणों में 0.38 अंकों की वृद्धि हुई. मेटाबॉलाइज स्कोर में 1.49 अंकों की वृद्धि हुई. साइकोलॉजिकल वेल-वीइंग में 0.14 अंकों की गिरावट आई तथा अपने स्वास्थ्य का मूल्यांकन में 0.45 अंकों की गिरावट आई.

क्या कहते हैं एक्सपर्ट

रिसर्च पर काम करने वाली वैज्ञानिक डॉ. तिया केकेलाइनेन ने कहा, 'हृदय रोग और कैंसर जैसी गैर-संचारी बीमारियां दुनिया भर में लगभग तीन-चौथाई मौतों का कारण बनती हैं. लेकिन एक स्वस्थ जीवन शैली का पालन करके एक व्यक्ति इन बीमारियों के विकास के जोखिम को कम कर सकता है और अपनी असमय मृत्यु की संभावना को कम कर सकता है.'

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'हमारे निष्कर्षों से यह बात उजागर होती है कि धूम्रपान, अत्यधिक शराब पीने और शारीरिक निष्क्रियता जैसे जोखिम भरे स्वास्थ्य व्यवहारों से यथाशीघ्र निपटने की आवश्यकता है ताकि इनसे होने वाले नुकसान को वर्षों तक बढ़ने से रोका जा सके जो बाद में जीवन में खराब मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य का कारण बनते हैं. हालांकि, स्वस्थ आदतें अपनाने में कभी देर नहीं होती. मध्य आयु में स्वस्थ आदतें अपनाने से बुढ़ापे में भी लाभ होता है.'

'वर्तमान अध्ययन के निष्कर्ष बताते हैं कि 36 से 61 वर्ष की आयु के बीच संबंध मुख्य रूप से समान थे. इससे पता चलता है कि अनहेल्दी लाइफस्टाइल के जोखिम 36 साल से ही दिखने लगते हैं.'

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