History Of Happy Hour: सस्ते में छककर पीने का जरिया कैसे बना 'हैपी आवर'? जानिए इतिहास

Happy hour history: क्लब और रेस्तरां पर कभी-कभार 'हैपी आवर' का बोर्ड टंगा दिखाई देता है. अमूमन यह समय शाम 4 बजे से 8 बजे तक या शाम 5 बजे से रात 9 बजे तक होता है. बहुत सारे लोगों के लिए ये कम पैसे खर्च कहीं रेस्तरां और बार में बिंदास पल बिताने का मौका बना जाता है. वहीं, 'हैपी आवर' में बढ़ती भीड़ दुकानदारों के लिए बढ़िया कमाई का जरिया बन जाती है.

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aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 15 सितंबर 2022,
  • अपडेटेड 4:57 PM IST

History of happy hour: शराब के शौकीन लोगों के लिए हैपी आवर्स (Happy Hours) किसी नेमत से कम नहीं. 'हैपी आवर' यानी वो समयावधि जिसमें कोई बार-रेस्तरां सामान्य से कम कीमत पर शराब परोसते हैं. इस दौरान विभिन्न तरह के ड्रिंक्स और कभी-कभी खाने की चीजों पर बड़ा डिस्काउंट दिया जाता है. अमूमन शाम 4 बजे से 8 बजे तक या शाम 5 बजे से रात 9 बजे तक 'हैपी आवर' की समयावधि होती है. बहुत सारे लोगों के लिए यह कम पैसे खर्च करके दोस्तों के साथ सुरूर भरे पल बिताने का मौका बन जाता है. वहीं, दुकानदारों के लिए कम कमाई वाले घंटों में मुनाफे को रफ्तार देने का जरिया. हालांकि, 'हैपी ऑफर' की शुरुआत कैसे हुई,  इसका पूरा इतिहास है.  

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शेक्सपियर के नाटक में हुआ जिक्र 
'हैपी आवर' शब्द युग्म का सबसे शुरुआती इस्तेमाल शेक्सपियर के नाटक 'हेनरी 5' में मिलता है. माना जाता है कि इस नाटक को 1599 ई में लिखा गया था. हालांकि, शेक्सपियर ने जिस 'हैपी आवर' का जिक्र किया, उसका शराब पर दिए जाने वाले डिस्काउंट से कोई संबंध नहीं है. शेक्सपियर ने इसका इस्तेमाल मनोरंजन के संदर्भ में किया गया है. नाटक में संवाद है, ''Therefore, my lords, omit no happy hour / That may give furtherance to our expedition” — and I agree, we should never omit a happy hour!

अमेरिकी नेवी से क्या है कनेक्शन 
इंटरनेट पर मौजूद प्रमाणिक स्रोतों को खंगालें तो पता चलता है कि 'हैपी आवर्स' बोले जाने की शुरुआत अमेरिकी नेवी में 1914 के आसपास हुई. हालांकि, उस वक्त इसका सस्ती शराब परोसे जाने से कोई कनेक्शन नहीं था. प्रथम विश्व युद्ध के दौरान नेवी के कर्मचारियों के लिए 'हैपी आवर' एक साप्ताहिक एंटरटेनमेंट प्रोग्राम होता था. इसका मकसद समंदर के बीच लंबे सफर से त्रस्त नाविकों की बोरियत को दूर करना था. इस कार्यक्रम में लाइव म्यूजिक, डांस, मूवी या बॉक्सिंग मैच आदि का आयोजन होता था. मुमकिन है कि यहां शराब भी परोसी जाती रही हो लेकिन इसका तब तक आज वाले 'हैपी आवर्स' से कोई कनेक्शन नहीं बना था. 

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शराब बंदी की वजह से चलन में आया 'हैपी आवर'
अमेरिका में 'हैपी आवर' को लोकप्रिय बनाने में सबसे बड़ा योगदान 1920 से लेकर 1933 तक यहां लागू शराब बंदी को जाता है. इसी दौर में आम अमेरिकी लोग शराब पीने से जुड़े खुफिया आयोजनों को 'हैपी आवर' कहने लगे. देखा जाए तो अमेरिकी लोग जानबूझकर कानून तोड़ रहे थे, इसलिए वे सीक्रेसी बरतते हुए शराब पीने के लिए लोगों को घरों पर आमंत्रित कर रहे थे. संयोग से यह वक्त शाम के 4-5 बजे से लेकर रात के 8-9 बजे तक का ही होता है. अमूमन यह रात के खाने के पहले का वक्त होता था. इस तरह, आम अमेरिकी जनता छुप-छुपकर शराब के मजे उठाने को  'हैपी आवर' कहने लगी.

 

यूं समाज का हिस्सा बना 'हैपी आवर'
अमेरिका में शराब पर पाबंदी खत्म होने के बाद 'हैपी आवर' की संकल्पना और मजबूत होती गई. जो चीजें छिपकर की जा रही थीं, उसकी मार्केटिंग विभिन्न रेस्तरां और बार खुलेआम करने लगे. 60 का दशक आते-आते अमेरिकी रेस्तरां और बार एक निश्चित समयावधि में 'हैपी आवर' के नाम पर सस्ती शराब और खाना परोसने लगे. इसका मकसद ज्यादा से ज्यादा ग्राहकों को खींचना था. आज कई दशकों के बाद दुनिया भर में शराब परोसने वाले दुकानदार 'हैपी आवर' को लेकर कई तरह की समयावधि और रणनीति को अपना रहे हैं. वहीं, शराब के शौकीन ग्राहक भी इस स्कीम का खूब फायदा उठा रहे हैं. वहीं, पूरी दुनिया में इसे मशहूर करने वाले अमेरिका में ही हैपी आवर पर पाबंदियां हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, सस्ती शराब परोसने के बाद इससे होने वाले हिंसा की घटनाओं और हादसों की वजह से कुछ अमेरिकी राज्यों में इसपर प्रतिबंध भी है.

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