तेजाब हमले की पीड़िताओं को 'सुप्रीम' राहत, अभी बंद नहीं होगा शेरोज कैफे

लखनऊ स्थित इस कैफे में तेजाब हमला झेल चुकी महिलाएं काम करती हैं. खाना बनाने से लेकर खाना परोसने तक का काम ये महिलाएं संभालती हैं, लेकिन इसे बंद करने का आदेश मिलने के बाद उनके सामने रोजी-रोटी की समस्या खड़ी हो गई थी.

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शेरोज कैफे की फोटो (आजतक आर्काइव) शेरोज कैफे की फोटो (आजतक आर्काइव)

रविकांत सिंह / संजय शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 10 अक्टूबर 2018,
  • अपडेटेड 4:01 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने तेज़ाब हमले की पीड़ितों को फ़ौरी राहत देते हुए लखनऊ में शेरोज कैफे हटाने के लिए 9 महीने की मोहलत दे दी. इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट को मामले को सुलझाने के लिए कह दिया है.

योगी सरकार ने तेज़ाब हमले की पीड़ितों को शेरोज कैफे खोलने के लिए अखिलेश यादव सरकार की ओर से दी गई जगह खाली करने का नोटिस दिया था. योगी सरकार ने उन्हें 30 अक्टूबर तक जगह छोड़ने के लिए कहा था. पीड़िताओं ने इलाहाबाद हाई कोर्ट से संपर्क किया लेकिन उन्हें वहां से कोई राहत नहीं मिली. इसके बाद इन लोगों ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल की.

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दरअसल उत्तर प्रदेश की तत्कालीन समाजवादी सरकार ने यह जगह मौखिक आश्वासन और बिना किसी लिखित आदेश के पीड़िताओं को दी थी लेकिन कैफे चलाने वाली पीड़िताओं का कहना है कि उनका जीवन इस कैफे पर ही निर्भर है.

लखनऊ में पॉश गोमती नगर में स्थित इस कैफे शेरोज में 15 तेजाब हमला पीड़ित काम करती हैं. कैफे में ऑर्डर लेने से खाना बनाने और परोसने तक का काम ऐसिड अटैक पीड़ित महिलाएं ही करती हैं. हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के आदेश के तहत शेरोज हैंगआउट की जगह मौजूदा संस्था को 22 अक्टूबर तक खाली करने का आदेश दिया गया था. अब यह अवधि 9 महीने आगे बढ़ गई है.

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