GST से बाजार ठप, चायवाले से लेकर फैक्ट्री मालिक तक परेशान: व्यापारी

जीएसटी से पहले चाइनीज प्रोडक्ट पर करीब 25 फीसदी का टैक्स लगता था जिससे मंहगा हो जाता था, लेकिन अब 18 फीसदी की जीएसटी में रिबेट मिलने से भारतीय उत्पाद से भी सस्ता हो गया है. स्टील इंडस्ट्री में तो 70 फीसदी की गिरावट आई है, जिसकी वजह से दर्जनों फैक्ट्रियां बंद हुई हैं और हजारों लोग बेरोजगार हुए हैं.

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प्रतीकात्मक फोटो प्रतीकात्मक फोटो

शरत कुमार / मोहित पारीक

  • जयपुर,
  • 30 सितंबर 2017,
  • अपडेटेड 12:10 AM IST

त्योहारों का सीजन शुरू हो गया है, लेकिन बाजार में रौनक अभी भी नहीं है. नोटबंदी के बाद जीएसटी की मार से राजस्थान के व्यापारी से लेकर मजदूर तक परेशान हैं. बाजार में अलग-अलग व्यवसाय 40 से लेकर 70 फीसदी तक गिरा हुआ है. मंदी की वजह से फैक्ट्रियों से 25 फीसदी तक मजदूरों की छंटनी हुई है और कोई चाय की थड़ीवाला चपरासी की नौकरी खोजने में लगा है.

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जयपुर के विश्वकर्मा इंडस्ट्रीयल इलाके में कमोबेश हर तरह के उधोग धंधे और कल-करखाने हैं, लेकिन यहां मंदी का असर साफ दिखाई दे रहा है. व्यापारियों का कहना है कि जीएसटी ने स्मॉल स्केल इंडस्ट्री को मार डाला है. मार्बल राजस्थान का सबसे बड़ा व्यवसाय है. इस पर 28 फीसदी जीएसटी लगा है. एक महीने में हर व्यवसायी करीब एक से डेढ़ करोड़ का जीएसटी भर रहा है, लेकिन रिफंड वापस नही मिल रहा है.

जीएसटी से पहले चाइनीज प्रोडक्ट पर करीब 25 फीसदी का टैक्स लगता था जिससे मंहगा हो जाता था, लेकिन अब 18 फीसदी की जीएसटी में रिबेट मिलने से भारतीय उत्पाद से भी सस्ता हो गया है. स्टील इंडस्ट्री में तो 70 फीसदी की गिरावट आई है, जिसकी वजह से दर्जनों फैक्ट्रियां बंद हुई हैं और हजारों लोग बेरोजगार हुए हैं.

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स्टील एसोसिएशन के नेता सीतराम अग्रवाल का कहना है कि जीएसटी के बाद से धंधा बैठ गया है. इसी दुर्गापूजा में मांग में करीब 100 फीसदी की उछाल आ जाती है, लेकिन आम दिनों से भी कम मांग रह गई है. विश्वकर्मा इंडस्ट्रीज के मार्बल एसोसिएशन के अध्यक्ष बनवारी लाल खेतान का कहना है कि करोड़ो की कैपिटल जीएसटी रिफंड में अटकी है कहां से धंधा हो. जबकि बगरु इंडस्ट्रीयल एरिया के अध्यक्ष राजकुमार अग्रवाल कहते हैं कि हमारे यहां तो जीएसटी के बाद छोटे उधोग बंद ही होने लगे हैं.

इस मंदी का असर सड़क किनारे बैठे चायवाले पर भी पड़ रहा है. पिछले 20 सालों से इंडस्ट्रीयल एरिया में चाय बेच रहे रमेशचंद कहते हैं कि पहले साढ़े चार किलो दूध की चाय बेच लेता था लेकिन अब तो ढाई किलो दूध की चाय भी नही बिकती है. लोग चाय पीने कम आते हैं और चाय भी कम मंगाते हैं.

सड़क किनारे बैठे मजदूर कह रहे हैं कि धंधे में इतनी गिरावट है कि हमारे 25 फीसदी साथियों को कंपनियों ने बाहर निकाल दिया है. वोडाफोन में काम करनेवाले नींदड़ गांव के रामदेव कुमावत कहते हैं कि हम पहले 25 लोग काम करते थे लेकिन अब दस लोग रह गए हैं.

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इसी तरह से सड़क किनारे मिट्टी और चिनी मिट्टी के सजावटी सामान और देवी-देवता बनाने वाले गंगाप्रसाद का कहना है कि कोई दुकान में आता नहीं है और इसबार तो पिछले बार से आधी बिक्री भी नहीं हुई है. चिनी मिट्टी पर 18 फीसदी जीएसटी लगा दिया तो 100 रुपए पर 18 रुपए ऐसे हीं बढ़ गए. सुबह से शाम तक पांच सौ की बिक्री नहीं हुई है. इसी तरह जयपुर के बाजारों में भी मंदी का असर है. दुकानदारों के अनुसार मार्बल करीब 60 फीसदी, स्टील 70 फीसदी, एक्सपोर्ट 50 फीसदी डाउन है. इसी तरह इलेक्ट्रोनिक्स उत्पादों की बिक्री पिछले साल 60 फीसदी कम है.

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