आईटी एक्ट की धारा 66 ए निरस्त होने के बाद नए विकल्प की तैयारी

पूर्व विधि सचिव और लोकसभा के पूर्व महासचिव की अध्यक्षता वाली कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि कानून लागू करने वाली एजेंसियों को आईटी के माध्यमों से हेट स्पीच फैलाने जैसे संवेदनशील मामलों में ज्यादा सतर्क और संवेदनशील रहने की जरुरत है.

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प्रतीकात्मक तस्वीर प्रतीकात्मक तस्वीर

संजय शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 28 सितंबर 2017,
  • अपडेटेड 10:24 PM IST

आईटी एक्ट की धारा 66 ए निरस्त किए जाने के बाद अब नया कानून लाने की तैयारी की जा रही है. इसी क्रम में अब ऐसे मामलों से निपटने के कानूनी और व्यवहारिक विकल्प की रिपोर्ट गृह मंत्रालय को सौप दी गई है. पूर्व विधि सचिव और लोकसभा के पूर्व महासचिव की अध्यक्षता वाली कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि कानून लागू करने वाली एजेंसियों को आईटी के माध्यमों से हेट स्पीच फैलाने जैसे संवेदनशील मामलों में ज्यादा सतर्क और संवेदनशील रहने की जरुरत है.

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इसके अलावा आईटी एक्ट की कुछ धाराओं को मसलन 78 में संशोधन की सिफारिश भी की गई है. इसके अलावा आईपीसी की धाराओं 153 और 505 में संशोधन की भी सिफारिश है. ये दोनों धाराएं नफरत फैलाने वाले भाषणों के दायरे में सिर्फ मुंह से निकलने वाली बातों को ही माना जाता है. हालांकि अब इस दायरे में इंटरनेट, ट्वीट या IT माध्यम से लिखी और फैलाई जाने वाली बातें भी शामिल करने की सिफारिश की गई है.

सुप्रीम कोर्ट के फैसले में आईटी एक्ट की धारा 66A को मनमाना करार देते हुए रद्द करने के बाद कोर्ट के ही आदेश पर विश्वनाथन कमेटी बनाई गई थी. उच्च अधिकार वाली इस कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि धारा 66A रद्द होने के बाद इंटरनेट और अन्य इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों पर खास तौर पर महिलाओं को ज्यादा निशाना बनाया गया.

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सरकार जितनी जल्दी रिपोर्ट पर अमल करते हुए उचित संशोधन करेगी तो ऐसे मामलों में कमी आएगी और दोषियों को कानून के शिकंजे में लाना आसान होगा. सिफारिशों में ये भी अहम है कि हर राज्य डीजीपी की अगुआई में साइबर क्राइम कॉर्डिनेशन कमेटी बनाने का सुझाव भी है.

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