छत्तीसगढ़ वैसे तो देश में तेजी से हुए औद्योगीकरण और पावर हब के रूप में जाना-पहचाना जाता है, लेकिन अब यह राज्य बेरोजगारी का भी हब बन गया है. केंद्र और राज्य सरकार रोजगार को लेकर भले ही जो दावे करें, लेकिन उन दावों की जमीनी हकीकत उस समय सामने आती है, जब रोजगार पाने के लिए नौजवानों की होड़ लग जाती है.
ऐसा ही नजारा रायपुर में देखने को मिला. स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों में चपरासी और वार्ड बॉय के 121 पदों के लिए भर्ती खोली. रोजगार पाने के लिए अपना आवेदन जमा करने वालों की कतार में बड़ी तादाद में पोस्ट ग्रेजुएट और ग्रेजुएट नौजवान कड़ी मशक्कत करते नजर आए.
मांगा था दसवीं पास, पहुंचे पोस्ट ग्रेजुएट, इंजीनियरिंग वाले
छत्तीसगढ़ में सरकारी अस्पताल में वार्ड बॉय और चपरासी के कुल 121 पदों के लिए करीब पंद्रह हजार नौ-जवान अपना फॉर्म जमा कराने के लिए जुट गए. ज्यादातर नौजवान पोस्ट ग्रेजुएट और इंजीनयरिंग की पढ़ाई पूरी कर चुके थे. हालाकि इन पदों के लिए शैक्षणिक अहर्ता दसवीं पास ही मांगी गई थी. इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि राज्य में बेरोजगारी का आलम क्या है. छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह दावा करते है कि रोजगार के अवसर बढ़े हैं. सबका साथ और सबका विकास के नारे के साथ हर हाथ को काम मिल रहा है, लेकिन बेरोजगारों का हाल देखिए. वो अपना आवेदन जमा करने के लिए सुबह से लेकर रात तक मेडिकल कॉलेज दफ्तर में डटे रहे.
आठ से दस हजार रुपये ही होगी तनख्वाह
दरअसल रायपुर के दाऊ कल्याण सिंह सुपर स्पेश्यालिटी हॉस्पिटल में वार्ड बॉय और चपरासी की भर्ती के लिए कुल 121 पदों की नियुक्ति के लिए आवेदन बुलाए गए थे. ये सभी पद कॉन्ट्रैक्ट बेसिस के तहत भर्ती किए जाने हैं. इसके लिए न्यूनतम अहर्ता दसवीं पास रखी गई है, जबकि वेतन भत्ते एक मुश्त अदाएगी के तहत कुल मासिक वेतन आठ से दस हजार के बीच है.
पहली नजर में जिन्होंने भी बेरोजगारों के हुजूम को देखा, उन्हें लगा की शायद बीजेपी या कांग्रेस की चुनावी रैली या आमसभा है. करीब जाकर जब उन्होंने पता किया तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई. इन बेरोजगारों को नियंत्रित करने के लिए पुलिस बुलानी पड़ी. इसके बावजूद भी जब फॉर्म जमा करने की होड़ मची रही तो पुलिस को लाठिया भांजनीं पड़ी.
दिनेश अग्रहरि / सुनील नामदेव