न्यू इंडिया में सरनेम मायने नहीं रखता, सबकी आवाज सुनी जाती है: PM मोदी

प्रधानमंत्री ने कहा, न्यू इंडिया में कुछ चुनिंदा लोगों की नहीं, बल्कि हर भारतीय की आवाज सुनी जाती है. यह एक ऐसा भारत है, जहां किसी भी व्यक्ति के लिए भ्रष्टाचार कभी भी विकल्प नहीं है. यहां योग्यता ही आदर्श है.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (ANI) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (ANI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 30 अगस्त 2019,
  • अपडेटेड 11:27 AM IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि यह एक नया भारत है, जहां युवाओं का सरनेम मायने नहीं रखता है. जो मायने रखता है, वह है उनका खुद का नाम बनाने की क्षमता. प्रधानमंत्री ने कहा, न्यू इंडिया में कुछ चुनिंदा लोगों की नहीं, बल्कि हर भारतीय की आवाज सुनी जाती है. यह एक ऐसा भारत है, जहां किसी भी व्यक्ति के लिए भ्रष्टाचार कभी भी एक विकल्प नहीं है. यहां योग्यता ही आदर्श है.

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प्रधानमंत्री ने कहा, कल्पना करें कि हरियाणा का कोई ग्रुप मलयालम सीखे और कर्नाटक वाले बंगाली. इससे बड़े बड़े फासले सिर्फ एक कदम में दूर किए जा सकते हैं, क्या हम पहला कदम बढ़ा सकते हैं? प्रधानमंत्री ने कहा, कोई व्यक्ति जब कोई दूसरी भाषा सीखता है तो इससे भारतीय संस्कृति में मेलजोल और अपनापन बढ़ता है. इससे लोगों में अलग अलग भाषाएं सीखने की ललक भी बढ़ती है.

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, हम बस देश भर में बोली जाने वाली 10-12 भाषाओं में एक शब्द को प्रकाशित करने के साथ काम शुरू कर सकते हैं. एक वर्ष में एक व्यक्ति अलग अलग भाषाओं में 300 से अधिक नए शब्द सीख सकता है. उन्होंने कहा, आप लोगों से एक विनम्र सुझाव है. क्या हम भाषा की शक्ति का उपयोग एकजुट करने के लिए नहीं कर सकते हैं? क्या मीडिया एक पुल की भूमिका निभा सकता है और अलग अलग भाषाओं को बोलने वाले लोगों को करीब ला सकता है. यह उतना मुश्किल नहीं है जितना लगता है.

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प्रधानमंत्री ने कहा, भारत संभवत: दुनिया का एकमात्र ऐसा देश है, जिसके पास इतनी सारी भाषाएं हैं. एक तरह से यह एक फोर्स मल्टीप्लायर है लेकिन देश में कृत्रिम दीवारें बनाने के लिए स्वार्थी हितों ने भाषा का भी शोषण किया है.

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