करगिल विजय के 20 साल पूरे होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तान को जमकर खरी-खरी सुनाई. प्रधानमंत्री ने करगिल युद्ध में प्राणों का बलिदान देने वाले शहीदों को नमन करने के साथ-साथ करगिल युद्ध में अदम्य शौर्य दिखाने वाले शहीद कैप्टन विक्रम बत्रा को भी याद किया. करगिल युद्ध के वक्त कैप्टन बत्रा को 'शेरशाह' बुलाया जाता था. उनकी एक लाइन का जिक्र प्रधानमंत्री ने अपने भाषण के दौरान किया.
पीएम ने अपने संबोधन में कहा, परमवीर चक्र विजेता कैप्टन विक्रम बत्रा ने कहा था, 'ये दिल मांगे मोर' तो उनका दिल किसके लिए मांग रहा था. अपने लिए नहीं, धर्म या जाति के लिए नहीं बल्कि पूरे देश के लिए, मां भारती के लिए. भाषण के बाद पीएम मोदी ने कैप्टन बत्रा के पिता से मुलाकात भी की. कैप्टन बत्रा ने पॉइंट 4875 से दुश्मनों को खदेड़ दिया था. जब वह अपने घायल सैनिकों को वापस ला रहे थे, तब दुश्मन की गोली का शिकार हो गए और देश ने एक बहादुर बेटा खो दिया. उनकी कमाल की रणनीति के कारण करगिल के पॉइंट 5140, पॉइंट 4750 और पॉइंट 4875 को दुश्मनों के कब्जे से छुड़ाया गया था.
पीएम मोदी ने कहा कि पिछले 5 साल में सैनिकों के कल्याण के लिए कई अहम फैसले लिए गए. अटल सरकार में पड़ोसी संग शांति की पहल से दुनिया का नजरिया बदला. लेकिन युद्ध में हारे लोग छद्म युद्ध के जरिए अपना राजनीतिक मकसद पूरा कर रहे हैं. उन्होंने कहा, आज युद्ध का स्वरूप बदल गया है, लड़ाइयां स्पेस तक पहुंच गई हैं. राष्ट्र की सुरक्षा में न किसी प्रभाव में काम होगा, न दबाव में और न अभाव में. पीएम ने कहा कि आने वाले वक्त में सेना को आधुनिक साजो-सामान मिलेगा. तीनों सेनाओं का आपस में जुड़ना समय की मांग है. वर्दी का रंग कोई भी हो, मकसद और मन एक होता है.
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