पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों से आम आदमी वैसे ही हलकान है, अब प्राकृतिक गैस (CNG और PNG) की बढ़ती कीमत से खाद से लेकर बिजली और यातायात के साधनों तक, सबकी लागत बढ़ने का अंदेशा हो गया है.
दिल्ली में सोमवार से सार्वजनिक कंपनी आईजीएल ने सीएनसी के दाम में 1.70 रुपये/Kg और पीएनजी में 1.30 रुपये प्रति स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर्स (scm) की बढ़ोतरी कर दी है. डॉलर के मुकाबले रुपये में लगातार गिरावट आने से सीएनजी और पीएनजी के रेट बढ़ गए हैं. अब दिल्ली में सीएनजी 44.30 रुपये/Kg और नोएडा, ग्रेटर नोएडा तथा गाजियाबाद में 51.25 रुपये/Kg मिल रही है.
एक महीने के भीतर गैस के खुदरा दाम में दो बार बढ़ोतरी हो चुकी है. इसके पहले 1 सितंबर को सीएनजी के दाम में 63 पैसे/Kg और पीएनजी के दाम में 1.11 रुपये प्रति एससीएम की बढ़ोतरी की गई थी.
सरकार का कहना है कि डॉलर के मुकाबले रुपये में भारी गिरावट आने से ऐसा करना मजबूरी हो गई है. अगस्त अंतिम से सितंबर अंतिम के एक महीने में सीएनजी के दाम में 2.63 रुपये/Kg और पीएनजी के दाम में 2.41 रुपये प्रति एससीएम की बढ़ोतरी हो चुकी है.
गैस कीमतें बढ़ने से अब यूरिया जैसे उर्वरकों के दाम बढ़ेंगे और बिजली उत्पादन की लागत भी बढ़ जाएगी. भारत अपनी गैस जरूरतों का 50 फीसदी से ज्यादा का आयात करता है. सूत्रों के मुताबिक घरेलू बाजार में कीमत बढ़ने से गैस आधारित बिजली उत्पादन 10 फीसदी महंगा हो जाएगा. उत्पादन महंगा हुआ तो इसका बोझ स्वाभाविक तरीके से कंपनियां उपभोक्ताओं के ऊपर डालेंगी.
पब्लिक ट्रांसपोर्ट की ज्यादातर बसें, कैब, ऑटो भी सीएनजी से चलती हैं. सीएनजी के दाम लगातार बढ़ने से ऑटो और कैब वाले भी रेट बढ़ाने को मजबूर हो सकते हैं.
राहुल श्रीवास्तव / दिनेश अग्रहरि