S-400 के बाद फ्रिगेट और क्लाश्निकोव की बारी, रूस से बहुत जल्द हो सकती है डील

रूसी राजदूत ने बताया कि अगले दो-तीन महीने में भारत और रूस के बीच युद्धपोत फ्रिगेट और क्लाश्निकोव असॉल्ट राइफल पर करार हो जाएगा.

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रूसी युद्धपोत फ्रिगेट (फोटो-रॉयटर्स) रूसी युद्धपोत फ्रिगेट (फोटो-रॉयटर्स)

रविकांत सिंह / गीता मोहन

  • नई दिल्ली,
  • 12 अक्टूबर 2018,
  • अपडेटेड 8:26 AM IST

भारत में रूस के राजदूत की मानें तो फ्रिगेट और क्लाश्निकोव पर भारत-रूस के बीच बहुत जल्द डील होने की संभावना है.

अभी हाल में दोनों देशों के बीच बहुप्रतिक्षित S-400 मिसाइल सिस्टम की खरीदारी को लेकर करार हुआ जब रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत दौरे पर आए थे. इस डील के बाद रूसी युद्धपोत फ्रिगेट और ऑटोमेटिक रायफल क्लाश्निकोव निर्माण पर सहमति बनने की संभावना बढ़ गई है.

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नई दिल्ली में कुछ चुनिंदा पत्रकारों से बात करते हुए रूसी राजदूत निकोलेई कुदाशेव ने कहा कि हो सकता है इस करार में कुछ देरी हो रही हो लेकिन अंततः भारत रूस से रक्षा उपकरणों और हथियारों की खरीद जरूर करेगा. कुदाशेव ने कहा, 'अगले महीनों में आप कुछ करार की उम्मीद कर सकते हैं. आशा है कि अगले दो या तीन महीने में फ्रिगेट्स और क्लाश्निकोव असॉल्ट रायफल पर करार हो जाए. हमें इंतजार करते हुए कुछ वक्त मिलिटरी को देना चाहिए. '

पत्रकारों ने डील पर CAATSA (काउंटरिंग अमेरिकाज एडवर्सरी थ्रू सैंक्शन्स एक्ट-काटसा) के संभावित असर को लेकर सवाल पूछा तो इसके जवाब में कुदाशेव ने कहा, मुझे नहीं लगता यह (काटसा) कोई रोड़ा बनेगा. राजदूत ने काटसा को अनुचित और बुरा बताया. उन्होंने कहा कि यह कानून राजनीतिक दबाव बनाने के लिए लाया गया है, जो न तो हमारे ऊपर और न ही किसी डील पर दबाव बना पाएगा.

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कुदाशेव का यह बयान ट्रंप की उस टिप्पणी के बाद आया है जिसमें उन्होंने भारत-रूस के बीच 5 अरब अमेरिकी डॉलर के S-400 डील को लेकर भारत के खिलाफ काटसा के प्रतिबंधों की ओर इशारा किया है. मीडिया रिपोर्टों में यह आशंका जताई गई थी कि अमेरिकी प्रतिबंधों के भय के कारण प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन ने अपने साझा बयान में S-400 डील का जिक्र नहीं किया.

कुदाशेव ने इस बात को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि 'हमारे रक्षा और सैन्य संबंध अहम हैं लेकिन भारत और रूस के बीच द्विपक्षीय संबंधों का आयाम सिर्फ यही नहीं है. हमारे संबंध के कई और भी पहलू हैं.  दोनों देशों के बीच काफी घनिष्ठ रिश्ते हैं.'  कुदाशेव ने हालांकि यह नहीं बताया कि डील के बाद संभावित प्रतिबंधों के बाद भारत और रूस अपने व्यापारिक और आर्थिक संबंधों को कैसे मजबूत रख पाएंगे.

कुदाशेव ने फिफ्थ जेनरेशन फाइटर एयरक्राफ्ट (एफजीएफए) को दोनों देशों के बीच शीर्ष प्राथमिकता नहीं बताया लेकिन इसे एजेंडे का मुख्य विषय जरूर करार दिया. कुदाशेव ने कहा, 'एफजीएफए डील बहुत जल्द सामने आएगी. यह हमारे एजेंडे में है लेकिन इसकी प्राथमिकता भारत की जरूरतों का खयाल रखते हुए तय की जानी है.'

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