सरकार की इस योजना को अब IMA का मिलेगा सहयोग

जयपुर में हुई आईएमए (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन) के राष्ट्रीय पदाधिकारियों, प्रदेश अध्यक्षों और सचिवों की बैठक के दौरान सर्वसम्मति से फैसला लिया गया कि आईएमए प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान को जागरुकता फैलाने में समर्थन और सहयोग करेगा.

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गर्भवती महिलाओं के हित में कार्यक्रम गर्भवती महिलाओं के हित में कार्यक्रम

रोशनी ठोकने

  • नई दिल्ली,
  • 17 अगस्त 2016,
  • अपडेटेड 8:41 PM IST

जयपुर में हुई आईएमए (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन) के राष्ट्रीय पदाधिकारियों, प्रदेश अध्यक्षों और सचिवों की बैठक के दौरान सर्वसम्मति से फैसला लिया गया कि आईएमए प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान को जागरुकता फैलाने में समर्थन और सहयोग करेगा. इस बारे में एक सर्कुलर जारी किया गया है कि आईएमए के 2.7 लाख सदस्य हर महीने की 9 तारीख को गर्भवती महिलाओं को सुबह 9 से 11 बजे तक मुफ्त सलाह दें.

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गर्भवती महिलाओं के हित में कार्यक्रम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस सुरक्षित मातृत्व अभियान की शुरुआत 9 जून 2016 को की थी. इस योजना का मकसद खासकर गरीब गर्भवती महिलाओं को स्वास्थ्य सेवा पहुंचाना है. योजना के तहत, गर्भवती महिलाएं हर महीने की 9 तारीख को हर सरकारी अस्पताल में जांच और इलाज करवाने की सुविधा दी गई है. आईएमए के नेशनल प्रेसीडेंट डॉ. एसएस अग्रवाल और ऑनरेरी सेक्रेटरी जनरल और हार्ट केयर फाउंडेशन के प्रेसीडेंट पद्मश्री डॉ. केके अग्रवाल ने बताया कि हमारा मानना है कि इस पहल का समर्थन निजी क्षेत्र को भी करना चाहिए और देश के हर डॉक्टर को हर महीने की 9 तारीख को आईएमए एंटी नेटल डे के रूप में मनाए.

महिलाओं को जागरूक करने की जरूरत
इसके साथ ही आईएमए ने स्थानीय और प्रदेश शाखाओं को नए विचार लागू करने और अन्य सुविधाएं जोड़ने के लिए भी कहा गया. इस अभियान का मकसद गर्भवती महिलाओं को देखभाल प्रदान करना है ताकि जच्चा और बच्चा दो दोनों स्वस्थ प्रसव तक स्वस्थ रहें और संस्थागत प्रसव की दर बढ़ाई जा सके. डॉ. अग्रवाल के मुताबिक इस कार्यक्रम में पोषण के बारे में जानकारी देने पर जोर दिया जाए ताकि महिलाओं में आयरन की कमी और एनीमिया को दूरी किया जा सके. साथ ही वैक्सीनेशन और विटामीन डी सप्लीमेनटेशन की आवश्यकता के बारे में भी सलाह देनी चाहिए.

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आईएमए गर्भ के दौरान होने वाली विभिन्न बीमारियों के बारे में भी अपने डॉक्टरों को लगातार ताजा जानकारी उपलब्ध करवाता रहता है. आर्थिक तौर पर कमजोर गर्भवती महिलाएं में अक्सर पोषण की कमी होती है इस वजह से बच्चा कुछ विकारों के साथ पैदा होता है और कुपोषित होता है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक अगर समय पर निगरानी रखी जाए तो नवजातों में होने वाली की बीमारियों को रोका जा सकता है.

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