आयुष्मान भारत आज केंद्र सरकार का फ्लैगशिप कार्यक्रम है, लेकिन शायद बहुत कम लोगों को यह पता है कि मोदी सरकार की इस महात्वाकांक्षी योजना के पीछे वरिष्ठ नेता अरुण जेटली की सोच रही है. जेटली जब राज्य सभा मे नेता प्रतिपक्ष थे, तभी से वह इस स्कीम की हिमायत कर रहे थे. वह तत्कालीन कांग्रेस सरकार के मंत्रियों को कहते थे कि लोक लुभावन घोषणा से ज्यादा जरूरी है सरकारी पैसे से एसेट बनाना. उन्होंने तत्कालीन कांग्रेस सरकार को यह अनौपचारिक सलाह दी थी कि कम से कम 3 से 5 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा लोगों को दिया जाए.
बीजेपी के कई नेता और उनके निकट के मित्र जेटली से यह कहते थे कि आप इतनी बड़ी योजना अपने विरोधी दल को क्यों बताते हैं? आपकी सरकार आएगी तो आप यह योजना लागू करवाइएगा ताकि पार्टी को फायदा हो. लेकिन वो रुके नही. इसी वजह से उन पर कांग्रेस हितैषी होने का आरोप भी लगा. जब उनसे अनौपचारिक बातचीत में पत्रकारों ने यह पूछा कि स्वास्थ्य योजना को लेकर कांग्रेस नेताओं को दी जाने वाली सलाह की वजह से आप पर भाजपा विरोधी होने का आरोप लग रहा है?
इन आरोपों पर अरुण जेटली ने जबाब दिया और कहा कि उन्हें ये सब मालूम है, लेकिन क्या सब कुछ राजनीति के लिए ही है? देश के लोगों की जरूरतें पहले समझना जरूरी है, पार्टी की जरूरत बाद में भी समझी जा सकती है. वो कहते थे कि अदालत और अस्पताल के खर्चों की वजह से लोग सड़क पर आ जाते हैं. इसलिए स्वास्थ्य बीमा योजना जरूरी है. 2018 में वह इस पर भी विचार करने लगे थे कि क्या कुछ ऐसा भी हो सकता है कि अदालती खर्च का भी बीमा शुरू हो सके. भले ही वह लाख-दो लाख तक का ही हो. लेकिन उसी समय बीमारी ने उन्हें घेर लिया और वह अपनी सोच को जमीन पर उतारने से शायद चूक गए.
पूर्व केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली का शनिवार को दिल्ली के एम्स में दोपहर 12 बजकर 7 मिनट पर निधन हो गया था. रविवार को पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई. उनकी अंत्येष्टि दिल्ली में यमुना किनारे निगमबोध घाट पर हुई. बेटे रोहन जेटली ने उन्हें मुखाग्नि दी. अरुण जेटली 66 साल के थे. रविवार को उनके पार्थिव शरीर को उनके आवास से दीनदयाल उपाध्याय मार्ग स्थित बीजेपी मुख्यालय लाया गया, यहां बड़ी संख्या में लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी.
सुजीत ठाकुर