प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को ईस्टर्न पैरिफेरल एक्सप्रेस वे का उद्घाटन कर इसे देश को समर्पित किया. इसके उद्घाटन से पहले ही केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान ने चिट्ठी लिखकर ताकीद की थी कि दोपहिया और तिपहिया वाहनों की एंट्री इस एक्सप्रेस-वे पर पूरी तरह से बैन हो, लेकिन दोपहिया वाहन ट्रैफिक नियमों को धता बताते हुए यहां चल रहे हैं.
135 किलोमीटर में फैली इस सड़क पर जब 50,000 से ज्यादा की संख्या में ट्रक और कार 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ेंगे, तो इनरलेन पर चलने वाले ट्रकों को कार और कम वजन वाले वाहन ओवरटेक करेंगे. ऐसे में मीडियम लेन पर चलने वाले दोपहिया और तिपहिया वाहन हल्की टक्कर से ही स्किड हो जाएंगे.
केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान के सीनियर वैज्ञानिक एस वेलमुरुगन का कहना है कि 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार अब तक कि सबसे ज्यादा स्पीड है, दोपहिया और तिपहिया वाहन सड़क पर उतरते ही भारी वाहनों के बराबर स्पीड पर नहीं चल पाएंगे और स्पीड का यह अंतर हादसे को दावत देगा.
यमुना एक्सप्रेस-वे पर अबतक हुए 4,956 हादसे
'आजतक' के हाथ वो खत लगा है जिसमें उद्घाटन के डेढ़ महीने पहले ही एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर को पेरिफेरल एक्सप्रेस- वे पर दोपहिया और तिपहिया वाहनों की एंट्री बंद करने को कहा गया है. एंट्री बंद करने की वजह बताते हुए सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्टिट्यूट (सीआरआरआई) ने कहा कि यमुना एक्सप्रेस-वे 2012 जून में शुरू हुआ और 2018 मार्च तक उस पर 4,956 हादसे हुए और करीब 718 लोगों की मौत हुई. वहीं 2100 लोगों को गंभीर चोट लगी.
बता दें कि वेस्टर्न इंडिया के 2 एक्सप्रेस-वे पर दोपहिया/तिपहिया वाहन नहीं चल सकते, जिनमें मुंबई-पुणे एक्सप्रेस वे (92 किलोमीटर) और अहमदाबाद-वडोदरा एक्सप्रेस वे (94 किलोमीटर) शामिल है. सीआरआरआई के सीनियर वैज्ञानिक एस. वेलमुरुगन ने कहा कि दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे पर भी दोपहिया और तिपहिया वाहन बंद होने चाहिए, क्योंकि यहां भी हादसे का खतरा ज्यादा है. ये सभी अर्बन रोड हैं, जहां से भारी वाहन गुजरेंगे.
परमीता शर्मा / राम किंकर सिंह