कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया द्वारा लिंगायतों को अलग धर्म की मान्यता देने पर बीजेपी आगबबूला हो गई है. लेकिन सच तो यह है कि कभी कर्नाटक बीजेपी के प्रमुख नेता येदियुरप्पा ने भी लिंगायत को अलग धर्म का दर्जा देने का समर्थन किया था. बीजेपी के मुख्यमंत्री पद के दावेदार बीएस येदियुरप्पा भी इसी समुदाय से आते हैं.
गौरतलब है कि कर्नाटक में विधानसभा चुनावों से ठीक पहले सत्तारूढ़ दल कांग्रेस ने वीरशैव लिंगायत को अलग धर्म की मान्यता देकर बड़ा दांव खेल दिया है. कांग्रेस के इस दांव से बीजेपी के लिए परेशानी खड़ी हो सकती है.
कर्नाटक बीजेपी ने कर्नाटक कांग्रेस के इस कदम की कटु आलोचना की है. राज्य बीजेपी ने कहा, 'कांग्रेस कैसे राजनीतिक फायदे के लिए लोगों को बांट रही है, यह देखकर ब्रिटिशर्स भी शर्म में डूब जाएंगे. सेक्युलर राष्ट्र कैसे एक नए धर्म को पैदा कर सकता है? संविधान के किन प्रवधानों के तहत एक अलग धर्म बनाया जा सकता है? कांग्रेस को इन सवालों को कोई परवाह नहीं है.'
राज्य बीजेपी के अध्यक्ष ने ट्वीट कर कहा, 'सिद्धारमैया आपको भूलना नहीं चाहिए, मुगल और ब्रिटिश शासन भी आपके मुकाबले कम जहरीला रहा है. आपको इतिहास में राज्य का सबसे शातिर मुख्यमंत्री माना जाएगा.' बीजेपी का कहना है कि कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव के लिहाज से यह निर्णय लिया है.
बीजेपी का तर्क है कि लिंगायत-वीरशैव समुदाय पूरी तरह से एक ही है, जबकि राज्य की कांग्रेस सरकार ने कहा है कि वीरशैव समुदाय के जो लोग समाज सुधारक बसव के दर्शन में विश्वास रखते हैं, सिर्फ उन्हें ही लिंगायत माना जाएगा.
सच तो यह है कि साल 2013 में बीजेपी के कर्नाटक के नेता बीएस येदियुरप्पा ने इसी तरह की मांग करने वाले एक ज्ञापन पर दस्तखत किए थे. तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को भेजे गए ज्ञापन में यह मांग की गई है कि जनगणना फॉर्म में वीरशैव-लिंगायत धर्म के लिए अलग कोड/कॉलम बनाया जाए, यानी वीरशैव-लिंगायत को अलग धर्म माना जाए.
निर्णायक भूमिका में हैं लिंगायत
राजनीतिक विश्लेषक लिंगायत को एक जातीय पंथ मानते हैं, ना कि एक धार्मिक. राज्य में ये अन्य पिछड़े वर्ग में आते हैं. करीब 21 फीसदी आबादी और आर्थिक रूप से ठीकठाक होने की वजह से कर्नाटक की राजनीति पर इनका प्रभावी असर है. बीजेपी ने विवादित येदियुरप्पा को सीएम पद का दावेदार बनाकर इस समुदाय को लुभाने की कोशिश की थी. हालांकि, अब कांग्रेस ने नया दांव खेला है. राजनीतिक कारणों की वजह से बीजेपी कांग्रेस के इस कदम का विरोध कर रही है. इससे लिंगायतों के बीजेपी से रूठकर कांग्रेस के खेमे में जाने की अटकलें लगाई जा रही हैं.
केंद्र के पाले में है गेंद
लिंगायत समुदाय लंबे समय से मांग कर रहे थे कि उन्हें अलग धर्म का दर्जा दिया जाए. कर्नाटक सरकार ने नागमोहन कमेटी की सिफारिशों को स्टेट माइनॉरिटी कमीशन एक्ट की धारा 2डी के तहत मंजूर कर लिया. अब इसकी अंतिम मंजूरी के लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा जाएगा. वहीं, दूसरी ओर बीजेपी का पक्ष रहा है कि वह लिंगायतों को हिंदू धर्म का ही हिस्सा मानती रही है. ऐसे में बीजेपी फिलहाल कांग्रेस के इस दांव की काट तलाश रही है.
दिनेश अग्रहरि