भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में सामाजिक कार्यकर्ता गौतम नवलखा और आनंद तेलतुंबडे को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. दोनों की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी गई है. इतना ही सुप्रीम कोर्ट ने दोनों कार्यकर्ताओं को तीन हफ्ते के अंदर सरेंडर करने को कहा है. साथ ही इन्हें अपना पासपोर्ट भी जमा करने को कहा गया है. वहीं आनंद तेलतुंबडे के वकील कपिल सिब्बल ने जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस एमआर शाह की बेंच से कहा कि इससे पहले 24 जनवरी की सुनवाई के दौरान भी इन्हें संरक्षण मिला था. लेकिन कोर्ट ने उनके तर्क को खारिज कर दिया.
इससे पहले 6 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने दोनों सामाजिक कार्यकर्ताओं को गिरफ्तारी से राहत को सोमवार तक के लिए बढ़ाया था. पुणे के सेशंस कोर्ट द्वारा अपनी याचिकाएं खारिज होने के बाद दोनों ने अपनी गिरफ्तारी पर रोक के लिए पिछले साल नवंबर में बॉम्बे हाई कोर्ट का रुख किया था.
बता दें कि 1 जनवरी, 2018 को पुणे जिले के भीमा कोरेगांव में हिंसा के बाद गौतम नवलखा, आनंद तेलतुंबड़े और कई अन्य कार्यकर्ताओं के खिलाफ पुणे पुलिस ने केस दर्ज किया था. उनपर माओवादियों से संबंध होने का आरोप है. पुणे पुलिस के अनुसार, 31 दिसंबर, 2017 को पुणे में आयोजित यलगार परिषद के सम्मेलन में भड़काऊ भाषणों ने अगले दिन भीमा कोरेगांव में जातिगत हिंसा भड़का दी थी. पुलिस के मुताबिक, सम्मेलन माओवादियों द्वारा समर्थित था.
इससे पहले पुणे सेशंस कोर्ट ने भी गौतम नवलखा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की थी. सुप्रीम कोर्ट ने सामाजिक कार्यकर्ता गौतम नवलखा को गिरफ्तारी से चार हफ्ते की अंतरिम सुरक्षा प्रदान की थी.
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कोर्ट ने गौतम नवलखा को अग्रिम जमानत के लिए संबंधित अदालत में जाने को कहा था. इससे पहले पुणे सेशंस कोर्ट ने 6 आरोपियों की जमानत याचिका खारिज की थी. ये आरोपी रोना विल्सन, शोमा सेन, सुरेंद्र गडलिंग, महेश राउत, वरवरा राव और सुधीर धवले हैं.
अनीषा माथुर