‘बहादुरी मारने में नहीं बचाने में': खुशबू चौहान को असम रायफल्स के जवान का जवाब

इसी प्रतियोगिता में दिया गए एक और भाषण का वीडियो सामने आया है, जिसमें असम रायफल्स में रायफलमैन बलवान सिंह भी इसी मुद्दे पर बोल रहे हैं. लेकिन उनके तर्क पूरी तरह से अलग हैं और अपने संबोधन में कहा कि बहादुरी मारने में नहीं किसी को बचाने में है.

Advertisement
खुशबू चौहान Vs बलवान सिंह खुशबू चौहान Vs बलवान सिंह

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 09 अक्टूबर 2019,
  • अपडेटेड 2:22 PM IST

  • CRPF कॉन्स्टेबल खुशबू चौहान के भाषण पर विवाद
  • मानवाधिकार नियमों को दिए तर्क पर विवाद
  • अब सामने आया जवान बलवान सिंह का वीडियो

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के द्वारा 27 सितंबर को आयोजित किए गए मानवाधिकार पर आयोजित वाद-विवाद प्रतियोगिता में दिए गए CRPF कॉन्स्टेबल खुशबू चौहान के भाषण ने काफी सुर्खियां बटोरीं. उनके भाषण पर एक बहस भी हुई, किसी ने तारीफ की और किसी ने आलोचना. इसके बाद में CRPF को सफाई भी देनी पड़ी. अब इसी प्रतियोगिता में दिया गए एक और भाषण का वीडियो सामने आया है, जिसमें असम रायफल्स में रायफलमैन बलवान सिंह भी इसी मुद्दे पर बोल रहे हैं. लेकिन उनके तर्क पूरी तरह से अलग हैं और अपने संबोधन में कहा कि बहादुरी किसी को मारने में नहीं बल्कि बचाने में है.

Advertisement

अब सोशल मीडिया पर बलवान सिंह का ये वीडियो वायरल हो रहा है, इस भाषण में उन्होंने मानवाधिकार नियमों का पालन किए जाने की वकालत की. अपने संबोधन में बलवान सिंह कहते हैं कि कहा जाता है कि मानवाधिकारों का अनुपालन कर पाना असंभव है, लेकिन आम लोगों के अधिकारों की रक्षा आखिर करेगा कौन?

इस प्रतियोगिता में हर कोई अपने तर्कों से सामने वाले को हराने में लगा था, ऐसे में उनके इस बयान को खुशबू चौहान के तर्कों का जवाब माना जा सकता है.

‘बहादुरी किसी को मारने में नहीं...’

बलवान सिंह ने कहा, ‘मानवाधिकार वो अधिकार हैं जो प्रत्येक व्यक्ति को मिलते हैं, अलग से भारत का संविधान भी नागरिकों को मौलिक अधिकार देता है. आतंकवाद-नक्सलवाद वाले स्थानों पर शांति स्थापित करने के लिए सुरक्षाबलों को तैनात किया जाता है, लेकिन ये भी सच है कि मानवाधिकार आयोग आवाज़ वहीं उठाता है जहां पर इनकी अनदेखी होती है.’

Advertisement

असम रायफल्स के जवान ने कहा कि साल 2000 से 2012 तक मणिपुर में पुलिस-सुरक्षाबलों में 1000 फर्जी मुठभेड़ दर्ज हुईं. देश में 2016 में पुलिस फायरिंग में 92 नागरिक मारे गए, लाठीचार्ज में भी कई लोगों की मौत. बहादुरी किसी को मारने में नहीं बचाने में होती है, अगर बम-बंदूक के दम पर शांति स्थापित होती तो कश्मीर-छत्तीसगढ़ में शांति हो गई होती.

जवान बलवान सिंह ने अपनी स्पीच में कहा कि क्रोध को क्रोध से नहीं प्यार से जीता जाता है, अब्राहम लिंकन ने भी गृह युद्ध खत्म करने के लिए दुश्मन को प्यार से जीतने की बात कही थी. असली जंग लोगों के दिल में लड़ी जाती है, इसे मानवाधिकारों का उल्लंघन कर नहीं बल्कि इनका सम्मान करके जीता जा सकता है. क्योंकि जहां मानवाधिकारों का उल्लंघन होता है वहां ही पान सिंह तोमर को डाकू बनना पड़ता है.

पूरा भाषण यहां सुनें:

खुशबू चौहान ने क्या कहा था?

इसी प्रतियोगिता में खुशबू चौहान ने एक भाषण दिया, जिसने सोशल मीडिया पर तीखी बहस छेड़ दी. उन्होंने अपने भाषण में कहा था कि उठो देश के वीर जवानों, तुम सिंह बनकर दहाड़ दो, एक तिरंगा उस कन्हैया के सीने में गाड़ दो. इसी भाषण पर काफी बहस हुई तो CRPF ने सफाई देकर कहा कि हम मानवाधिकार का समर्थन करते हैं, लेकिन ये भाषण वाद-विवाद में दिया गया था इसलिए इससे ऑफेंड ना हों.

Advertisement

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement