चुनाव नहीं जीत पाए लेकिन चुनावी रणनीति के माहिर थे अरुण जेटली

अरुण जेटली भले ही कोई लोकसभा चुनाव जीता हो, लेकिन उनकी अहमियत भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेताओं में रही. उन्हें पार्टी का चाणक्य भी कहा गया क्योंकि वह चुनावी रणनीति बैठाने में माहिर थे.

पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली (फाइल फोटो)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 25 अगस्त 2019,
  • अपडेटेड 2:23 PM IST

  • 34 सालों तक जेटली सीधे चुनावी रण में नहीं उतरे
  • 2014 में अमृतसर से लड़े थे लोकसभा चुनाव, लेकिन हारे

पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली का शनिवार को लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया. देश की राजनीति में जेटली की भूमिका हमेशा याद की जाएगी. जेटली भले ही जनाधार के नेता न रहे हों, लेकिन उनकी अहमियत भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेताओं में रही. उन्हें पार्टी का चाणक्य भी कहा गया क्योंकि वह चुनावी रणनीति के माहिर थे.

1974 में अरुण जेटली ने दिल्ली छात्र संघ का चुनाव जीता था. 1977 में वे जनसंघ में शामिल हुए. 1980 में वे बीजेपी में सक्रिय हो गए थे, लेकिन 34 सालों तक वे सीधे चुनावी रण में नहीं उतरे थे. 2014 में जब बीजेपी नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चुनाव लड़ रही थी तो जेटली चुनाव लड़ने उतरे. पार्टी ने जेटली के लिए पंजाब की अमृतसर लोकसभा सीट फाइनल की. हालांकि उन्हें कांग्रेस के दिग्गज नेता कैप्टन अमरिंदर सिंह ने जीतने नहीं दिया.  

नीतीश को दिलाई सत्ता की चाबी

बिहार की राजनीति में अरुण जेटली की असल भूमिका चारा घोटाले के दौर में शुरू हुई थी. यहीं से लालू राज का ढलना  शुरू हो गया था. हालांकि लालू के बाद राबड़ी देवी सत्ता में बनी रहीं, लेकिन जेटली भी अपनी गणित बैठाते रहे. 2005 के विधानसभा चुनाव में अरुण जेटली को बिहार बीजेपी का प्रभारी बनाया गया. उस वक्त राबड़ी देवी की वापसी तय मानी जा रही थी, लेकिन लालू-पासवान में आपसी कलह की वजह से राज्य में राष्ट्रपति शासन तक की नौबत आ गई. दरअसल, जनता भी लालू-राबड़ी का विकल्प ढूंढ रही थी. जेटली ने इस मौके को भांपते हुए प्रमोद महाजन को विश्वास में लेते हुए नीतीश कुमार को एनडीए का मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कराया और उन्हें न्याय यात्रा पर निकलने की सलाह दी. अक्टूबर-नवंबर के चुनाव में जेटली ने खुद पटना में चुनाव प्रचार किया था. इसके बाद नीतीश कुमार की पूर्ण बहुमत वाली सरकार बनी. तब से अब तक नीतीश कुमार राज्य के सीएम हैं.

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15 साल सीएम रहे शिवराज सिंह

अरुण जेटली कभी चुनाव नहीं जीत पाए, लेकिन जहां भी उन्होंने चुनावी बिसात बिछाई वहां बीजेपी को मजबूत स्थिति में पहुंचाया. 2003 में उन्हें मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव की कमान सौंपी गई, जिसके बाद राज्य में बीजेपी ने 15 साल शासन किया. मध्य प्रदेश में कांग्रेस के दिग्गज दिग्विजय सिंह को पटखनी देने में जेटली की मुख्य रणनीतिक भूमिका थी. उन्हीं की बनाई रणनीति के बाद शिवराज सिंह चौहान 15 साल तक राज्य मुखिया बने रहे.

कर्नाटक में खिलाया कमल

2008 कर्नाटक विधानसभा चुनाव की कमान अरुण जेटली को सौंपी गई थी. कर्नाटक में पहली बार कमल खिलाने का श्रेय भी इन्हें ही दिया जाता है. हालांकि कर्नाटक की सियासत में जेटली बहुत सक्रिय नहीं दिखे, लेकिन पहली बार राज्य में कमल खिलाने में बड़ी भूमिका निभाई. इसके अलावा जेटली ने पंजाब और हिमाचल प्रदेश में भी पार्टी के लिए अहम कड़ी रहे थे.

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