गहलोत सरकार का आदेश- अस्थियां विसर्जित करने जा रहे लोगों की यात्रा होगी मुफ्त

अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली राजस्थान सरकार ने उत्तराखंड सरकार के साथ समझौता किया है. अब राजस्थान के लोग विशेष बसों की मदद से आसानी से हरिद्वार जाकर अपने परिजनों की अस्थियों को गंगा नदी में प्रवाहित कर सकेंगे.

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एक श्मशान घाट में रखी अस्थियां (फाइल फोटो-PTI) एक श्मशान घाट में रखी अस्थियां (फाइल फोटो-PTI)

देव अंकुर

  • जयपुर,
  • 22 मई 2020,
  • अपडेटेड 11:56 PM IST

  • श्मशान घाट में रखी अस्थियां कर रही थीं इंतजार
  • अब अस्थियों को विसर्जित करने जा सकेंगे परिजन

लॉकडाउन के दौरान राजस्थान की गहलोत सरकार ने आज एक अहम फैसला लिया है. लॉकडाउन की वजह से राज्य के तमाम ऐसे परिवार थे जो अपने परिजनों के अवशेष गंगा नदी या अन्य धार्मिक स्थानों पर प्रवाहित नहीं कर पा रहे थे. ऐसे लोगों के लिए गहलोत सरकार का यह फैसला राहत भरा होने वाला है. दरअसल, राजस्थान सरकार ने आदेश दिया है कि लॉकडाउन अवधि में लोगों को अपने परिजनों के अवशेषों के विसर्जन के लिए जाने के लिए विशेष बसें मुफ्त में चलेंगी.

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इसके लिए अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली राजस्थान सरकार ने उत्तराखंड सरकार के साथ समझौता किया है. जिसके बाद अब राजस्थान के लोग विशेष बसों की मदद से आसानी से हरिद्वार जाकर अपने परिजनों की अस्थियों को गंगा नदी में प्रवाहित कर सकेंगे. बताया जा रहा है कि राजस्थान सरकार उत्तर प्रदेश सरकार के साथ भी इसी तरह का समझौता करने की कोशिश कर रही है.

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गहलोत सरकार के फैसले के अनुसार, मृतक के परिवार के दो या तीन सदस्य उसके अवशेषों के विसर्जन के लिए इस व्यवस्था के तहत यात्रा करने में सक्षम होंगे. जानकारी के मुताबिक यह निर्णय शुक्रवार को मुख्यमंत्री निवास में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में लिया गया है.

दिल्ली के सीमापुरी श्मशान घाट में भी रखी हैं अस्थियां

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दुनियाभर में कोरोना लॉकडाउन के चलते सब कुछ थम सा गया है. लॉकडाउन की वजह से दिल्ली के सीमापुरी स्थित श्मशान घाट में अस्थियां रखी हुई हैं जिन्हें हरिद्वार में गंगा नदी में प्रवाहित किया जाना है. लेकिन लॉकडाउन की वजह से इन अस्थियों को लोग हरिद्वार नहीं ले जा पा रहे हैं.

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दिल्ली के सीमापुरी इलाके में स्थित श्मशान घाट पर कई अस्थियां रखी हुई हैं. लॉकडाउन खुलने का इंतजार किया जा रहा है ताकि इन्हें हरिद्वार में प्रवाहित किया जा सके. लेकिन हालात को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि मरने के बाद भी इंसान को मुक्ति नहीं मिल पा रही है.

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