सांभर झील में ‘बोटुलिज़्म’ के शिकार हज़ारों प्रवासी पक्षी, CM ने की पुष्टि

राजस्थान में अशोक गहलोत सरकार ने पुष्टि की है कि जयपुर की सांभर झील में हज़ारों प्रवासी पक्षियों की मौत बोटुलिज़्म की वजह से हुई है.

Advertisement
जयपुर की सांभर झील में हज़ारों प्रवासी पक्षियों की मौत (फोटो-PTI) जयपुर की सांभर झील में हज़ारों प्रवासी पक्षियों की मौत (फोटो-PTI)

देव अंकुर

  • जयपुर,
  • 22 नवंबर 2019,
  • अपडेटेड 1:25 PM IST

  • जयपुर की सांभर झील में हज़ारों प्रवासी पक्षियों की मौत बोटुलिज़्म से
  • CM गहलोत ने बरेली की सरकारी लैब की रिपोर्ट के हवाले से दी जानकारी

राजस्थान में अशोक गहलोत सरकार ने पुष्टि की है कि जयपुर की सांभर झील में हज़ारों प्रवासी पक्षियों की मौत ‘बोटुलिज़्म’ की वजह से हुई है.

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के मुताबिक बरेली स्थित सरकारी लैब की रिपोर्ट में प्रवासी पक्षियों की मौतों की वजह बोटुलिज़्म बताया गया है.

Advertisement

इससे पहले बीकानेर से आई रिपोर्ट में भी पक्षियों की इतनी बड़े पैमाने पर मौतों के लिए बोटुलिज़्म को संभावित कारण बताया गया था. सांभर झील जयपुर से 60 किलोमीर की दूरी पर स्थित है.

बोटुलिज़्म है क्या?

ये एक किस्म की फूड पॉयजनिंग है जो बोटुलिन के शरीर में जाने से होती है. ये सेंट्रल नर्वस सिस्टम (CNS) को प्रभावित करती है.

क्या कहा मुख्यमंत्री ने?

मुख्यमंत्री गहलोत ने कहा, “सरकार की ओर से उठाए गए कदमों का असर देखा जा रहा है. बीकानेर में हमारे इंस्टीट्यूट ने बीमारी का नाम बोटुलिज़्म बताया था. बरेली की सरकारी लैब से हाल में मिली जानकारी में भी इसी बीमारी से पक्षियों की मौतों की पुष्टि हुई है. सवाल ये है कि भविष्य में भी जांच जारी रहनी चाहिए. मैं पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को भी चिट्ठी लिख चुका हूं. ”

Advertisement

उन्होंने कहा, 'मैं भारत सरकार के सचिव से भी आग्रह करूंगा कि वो यहां आएं. पहले वैज्ञानिक यहां आए और उन्होंने सैम्पल लिए. ये काम नहीं करने वाला है...अनुसंधान होना चाहिए. मौतों के पीछे कारण क्या है? मौतें शुरू होने के पीछे कारण क्या हैं? ये सब जानने के बाद हम सुनिश्चित करना चाहेंगे कि भविष्य में ऐसा ना हो?”

बता दें कि सांभर झील में 15,000 से अधिक प्रवासी पक्षी मृत पाए गए. हर साल सर्दियों में हजारों प्रवासी पक्षी इस विश्व प्रसिद्ध झील को अपना प्राकृतिक ठिकाना बना लेते हैं. हालांकि इस बार हज़ारों किलोमीटर दूर से आए प्रवासी पक्षियों में से बड़ी संख्या के लिए ये झील मौत की झील बन गई.

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement