कोरोना वायरस का संकट राजस्थान में बढ़ता जा रहा है. यही वजह है कि लॉकडाउन 3.0 के तहत राहत मिलनी शुरू हुई है तो गहलोत सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्य की सभी सीमाओं को सील करने का आदेश दिया है, ताकि प्रदेश में कोई बाहरी व्यक्ति ना आ पाए. इसके चलते राजस्थान में जगह-जगह हजारों प्रवासी मजदूर फंस गए हैं. महाराष्ट्र, गुजरात से लेकर उत्तराखंड के प्रवासी मजदूर सड़कों पर घर जाने के लिए परेशान हैं.
कोरोना वायरस ऐसी त्रासदी लेकर आई है कि राजस्थान की सड़कों पर हर तरफ मजदूर ही मजदूर दिखाई दे रहे हैं. गुजरात और महाराष्ट्र के मजदूर 15 दिनों की यात्रा करने के बाद घर जाने के लिए जगह-जगह भटक रहे हैं. छोटे-छोटे बच्चों के साथ महिलाएं भी घर जाने के लिए परेशान हैं. सबका एक ही दर्द है कि वहां पर कुछ भी नहीं बचा तो रहकर करते क्या? वहीं, उत्तराखंड के 40 से ज्यादा बच्चे पिछले 4 दिनों से राजस्थान की सड़कों पर बैठे हुए हैं.
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गुजरात के वापी से जयपुर पहुंची मीना दो मसूम बच्चों को लेकर पति के साथ बस स्टैंड पर बैठी है. मीना का कहना है कि कई दिनों पैदल चलने के बाद राजस्थान के बॉर्डर तक पहुंचे थे, वहां से सरकार के इंतजाम से जयपुर तो पहुंच गए मगर अब करौली जाने के इंतजार में बैठे हैं. यहां से ना तो कोई साधन है और ना ही कोई व्यवस्था. ऐसे में हम बच्चों को लेकर कैसे घर पहुंचे.
मीना की तरह ही सैकड़ों मजदूर हैं जो पैदल घंटों सड़कों पर चल रहे हैं. इन सब का यही कहना है कि गुजरात में काम बंद हो जाने से घर जाने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है. इसलिए हम लोग घर के लिए निकले हैं मगर कब घर जाएंगे कुछ भी पता नहीं है. कोई नहीं बताता कि कोई हमें पहुंचाएगा भी या नहीं. हम ऐसे ही इस गर्मी में पैदल चलते रहेंगे.
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राजस्थान में सबसे बुरी हालत उत्तराखंड के 40 लड़कों की है, जो सड़क पर ही चार दिनों से बैठे हैं. इनका कहना है कि 4 दिन पहले इनके मोबाइल पर मैसेज आया था कि उत्तराखंड की बस आ रही है आप लोग सिंधी कैंप पहुंचे यह लोग जैसे तैसे दूरदराज के इलाकों से जयपुर तो आ गए हैं, लेकिन यहां ना तो कोई बस है और ना ही कोई साधन.
उत्तराखंड के बच्चे सुलभ शौचालय में नहाते हैं और सरकार की तरफ से बांटी जाने वाली खिचड़ी खा कर 4 दिनों से राजस्थान की सड़क पर गुजारा कर रहे हैं. जयपुर के पांच सितारा होटल ली-मेरिडियन में काम करने वाला नरेश कहता है कि हम तो अच्छा खासा होटल में थे, लेकिन अब 4 दिन से सड़क पर पड़े हैं. यहां कोई हाल खबर लेने वाला नहीं है.
केंद्र सरकार और राजस्थान सरकार भले ही कह रही है कि मजदूरों को अप्रैल का पूरा वेतन मिलना चाहिए लेकिन यहां जितने भी मजदूर हैं सबका कहना है कि मालिकों ने अप्रैल का वेतन तो दूर मार्च में भी 10 दिन का वेतन काट कर दिया है. कई श्रमिकों को तो मार्च का भी वेतन नहीं दिया गया है. ऐसे में मजदूरों को अब एक तरफ खाने के लाले पड़ रहे हैं तो दूसरी तरफ घर जाने के लिए सड़क पर रात गुजारनी पड़ रही है.
शरत कुमार