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PHOTOS: देखिए वो 10 चेहरे जो बीजेपी की पहचान बने

aajtak.in
  • 06 अप्रैल 2017,
  • अपडेटेड 7:41 AM IST
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पंडित दीनदयाल उपाध्याय सन 1953 से 1968 तक भारतीय जनसंघ के नेता रहे. एक गम्भीर दार्शनिक एवं गहन चिंतक होने के साथ-साथ वह एक समर्पित संगठनकर्ता और नेता थे. सन 1955 में वो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के उत्तर प्रदेश के प्रांतीय संगठक (प्रान्त प्रचारक) बने.

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अटल बिहारी वाजपेयी 1957 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनसंघ के टिकट पर जीतकर पहली बार सांसद बने. जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी के निधन के बाद 1969 में वाजपेयी भारतीय जनसंघ के अध्यक्ष चुने गए. 1980 में बीजेपी के गठन के साथ ही पहले अध्यक्ष के रूप में पार्टी की कमान संभाली. 1996, 1998, 1999 और 2004 में देश के प्रधानमंत्री बने. पीएम के रूप में पाकिस्तान के प्रति सबसे नरम रवैया वाजपेयी ने दिखाया.

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लालकृष्ण आडवाणी अप्रैल 1970 में पहली बार राज्यसभा सांसद चुने गए. इसके बाद 1973 में भारतीय जनसंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने. 1977 में जनता पार्टी की सरकार में केंद्र में मंत्री बने. 1986-90 तक पहली बार बीजेपी का अध्यक्ष पद संभाला. सितंबर 1990 में राम मंदिर आंदोलन के तहत सोमनाथ से अयोध्या तक ऐतिहासिक रथ यात्रा निकाली. आडवाणी की रथयात्रा के बाद बीजेपी का इतिहास बदल गया और वह अचानक से देश की बड़ी पार्टी बन गई.

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डॉ. मुरली मनोहर जोशी 10 साल की उम्र में आरएसएस से जुड़े. इसके बाद एबीवीपी और 1957
में जनसंघ ज्वाइन की. जोशी जनसंघ के अग्रणी नेताओं में रहे. 1977 में लोकसभा सांसद बने. इसके बाद जनता पार्टी के महासचिव नियुक्त हुए. 1991 से 1992 तक बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे. इसी दौरान अयोध्या आंदोलन में उन्होंने मुख्य भूमिका निभाई.

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1980 में बीजेपी के गठन के साथ ही कल्याण सिंह ने पार्टी का दामन थाम लिया और यूपी में बीजेपी की राजनीति के सबसे बड़े नेता साबित हुए. 1991 में कल्याण सिंह यूपी के मुख्यमंत्री बने. इन्हीं के कार्यकाल में अयोध्या में बाबरी मस्जिद का ढ़ांचा ध्वस्त किया गया. जिसके बाद सीएम पद से कल्याण सिंह को इस्तीफा देना पड़ा. हालांकि इसके बाद एक बार फिर 1997 में वो यूपी के सीएम बने. फिलहाल वो राजस्थान के राज्यपाल हैं.

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कुशाभाऊ ठाकरे आजादी से पहले 1942 में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़े. संघ के प्रचारक के तौर देश के कई इलाकों में काम किया. 1956 में भारतीय जनसंघ से जुड़े और आपातकाल के दौरान 19 महीने जेल में रहे. 1979 में सांसद बने. 1980 में बीजेपी बनने के बाद संगठन में बड़ा काम किया. गुजरात, एमपी, ओडिशा के इंचार्ज रहे. 1998 से 2000 तक बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे और उनके कुशल नेतृत्व में बीजेपी को केंद्र की सत्ता प्राप्त हुई.

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नरेंद्र मोदी ने साल 1950 में गुजरात के वडनगर में एक बेहद साधारण परिवार में जन्म लिया. 17 साल की उम्र मोदी आरएसएस से जुड़े. इसके बाद 1974 में नव निर्माण आंदोलन में शामिल हुए. 1988-89 में बीजेपी की गुजरात ईकाई के महासचिव बनाए गए. लालकृष्ण आडवाणी की रथ यात्रा को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई. 2001 में केशुभाई पटेल को सीएम पद से हटाकर मोदी को गुजरात की कमान सौंपी गई. 2002 में भीषण दंगे हुए और उनकी भूमिका पर सवाल उठे. इसी साल वो फिर से सीएम बने. इसके बाद 2007 और 2012 में लगातार चौथी बार गुजरात के सीएम बने. 2014 में बीजेपी ने उनके नेतृत्व में चुनाव लड़ा और पार्टी ने केंद्र में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई.

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राजनाथ सिंह छात्र जीवन से ही आरएसएस से जुड़ गए. इसके बाद एबीवीपी से जुड़कर छात्र राजनीति की. 1972 में यूपी के मिर्जापुर में आरएसएस के कार्यवाहक बने. 1977 में पहली बार यूपी विधानसभा का चुनाव जीता और विधायक बने. कल्याण सिंह की सरकार में शिक्षा मंत्री रहे. 1997 में यूपी बीजेपी की कमान संभाली. इसके बाद 1999 में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार में मंत्री बने. सन 2000 में यूपी के सीएम बने. इसके बाद राजनाथ ने केंद्र की राजनीति संभाली. 2005 में वो बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने. दो बार पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे राजनाथ सिंह का विवादों से नाता नहीं रहा. फिलहाल केंद्र सरकार में दूसरे नंबर की हैसियत से गृहमंत्री के पद पर तैनात हैं.

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अमित शाह एबीवीपी से होते हुए बीजेपी की राजनीति में शामिल हुए. नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में गुजरात सरकार में गृहमंत्री रहे. जल्द ही वो मोदी के सबसे करीबी लोगों में शुमार हो गए. अमित शाह पर सोहराबुद्दीन फर्जी मुठभेड़ का आरोप लगा. वो जेल में भी रहे. 2014 में बीजेपी की जीत के चाणक्य के रूप में उभरे और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने. अमित शाह के नेतृत्व में बीजेपी ने महाराष्ट्र, हरियाणा, यूपी समेत कई राज्यों में सरकार बनाई.

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योगी आदित्यनाथ का असली नाम अजय सिंह बिष्ट है. उनका जन्म 5 जून 1972 को उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले एक छोटे से गांव पंचूर में हुआ. गोरखनाथ मठ के महंत अवेद्यनाथ 21 साल की उम्र में उन्हें गोरखपुर ले आए. 1998 में महज 26 साल की उम्र में गोरखपुर से पहली बार सांसद बनें और लगातार पांच बार सांसद रहे. योगी ने हिंदू युवा वाहिनी का गठन किया. योगी अपने जहरीली भाषणों के लिए जाने जाते हैं. फिलहाल यूपी के सीएम हैं और उन्हें मोदी के बाद केंद्र में बीजेपी के चेहरे के रूप में पेश करने की आवाज भी उठने लगी हैं.

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