लद्दाख में 14200 फीट की ऊंचाई पर होगी 21 किलोमीटर लंबी मैराथन, देखें तैयारियों की VIDEO

चीन के बॉर्डर से सटी पैंगोंग झील पर 20 फरवरी को 21 किलोमीटर लंबी मैराथन होगी. इस दौरान गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड की टीम भी मौजूद होगी. मैराथन में हिस्सा लेने वाले सभी 75 प्रतियोगियों को पहले लद्दाख में पहुंचना होगा. इसके बाद उनका मेडिकल चेकअप किया जाएगा कि वह इतनी ऊंचाई पर दौड़ लगा भी सकते हैं या नहीं?

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लद्दाख में मैराथन से पहले जांच करती टीम लद्दाख में मैराथन से पहले जांच करती टीम

आशुतोष मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 14 फरवरी 2023,
  • अपडेटेड 10:02 AM IST

चीन के बॉर्डर से सटी पैंगोंग झील पर मैराथन का आयोजन किया जा रहा है. लद्दाख में 14200 फीट की ऊंचाई पर इस झील का पानी इन दिनों जम चुका है. जिस ऊंचाई पर ठीक से ऑक्सीजन भी नहीं आती. वहां 75 प्रतियोगी ऐतिहासिक मैराथन दौड़ लगाएंगे.

21 किलोमीटर लंबी इस मैराथन के दौरान गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड की टीम भी मौजूद होगी. 20 फरवरी को लद्दाख के लुकुम इलाके से मान इलाके तक यानी 21 किलोमीटर लंबी मैराथन के लिए प्रशासन की ओर से सारी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं.
 
इस मैराथन में दौड़ लगाने के लिए सभी 75 प्रतियोगियों को पहले लद्दाख में पहुंचना होगा. इसके बाद उनका मेडिकल चेकअप किया जाएगा कि वह इतनी ऊंचाई पर दौड़ लगा भी सकते हैं या नहीं?
 
मैराथन से पहले रविवार को विशेषज्ञों की टीम जमी हुई झील का मुआयना कर चुकी है. इस झील के ऊपर प्रतियोगी‌‌ जिस हिस्से पर दौड़ लगाएंगे, उसको चिन्हित किया जाएगा, ताकि कहीं कोई अप्रिय घटना न हो. 

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एडवेंचर स्पोर्ट्स फाउंडेशन ऑफ लद्दाख की टीम इस पूरे मैराथन के लिए तैयारियां कर रही है. मैराथन के दौरान लद्दाख ऑटोनॉमस हिल डेवलपमेंट काउंसिल और लद्दाख एडमिनिस्ट्रेशन के साथ ही भारतीय सेना ITBP, पुलिस, SDRF के साथ-साथ माउंटेनियरिंग गाइड इंस्टीट्यूट के विशेषज्ञ भी मौजूद रहेंग.  जो आपात स्थिति में रेस्क्यू की सुविधा मुहैया कराएंगे. इसके साथ ही मेडिकल टीम भी अलर्ट मोड पर रहेगी. 

चुशूल के काउंसलर कोंचुक स्टैंजिन ने आजतक को बताया कि यह बेहद ऐतिहासिक घटना होगी, जिसे जी-20 के तहत आयोजित किया गया है. इससे न सिर्फ ग्रामीण टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि इससे ग्लेशियर को बचाने के लिए अवेयरनेस को भी बढ़ावा मिलेगा. उनके मुताबिक मैराथन को लास्ट रन नाम दिया गया है, ताकि लोगों को बताया जा सके कि ग्लेशियर कितना महत्वपूर्ण है और क्लाइमेट चेंज कितना गंभीर विषय है.

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