संसद के शीतकालीन सत्र के पहले ही दिन 12 सांसदों को निलंबित (12 MPs suspended) कर दिया गया था. यह निलंबन 11 अगस्त को मॉनसून सत्र के दौरान हुए हंगामे को लेकर किया गया था, जिसपर विपक्ष झुकने को तैयार नहीं है. इन 12 सांसदों में से एक, शिवसेना सांसद अनिल देसाई भी हैं, जिनका कहना है कि सरकार को इस फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए.
हर किसी को बोलने का मिले मौका
शिवसेना के निलंबित राज्यसभा सांसद अनिल देसाई का कहना है कि जो आरोप हमपर लगाए गए हैं वे गलत हैं और इस तरह निलंबित किया जाना भी ठीक नहीं है. उन्हंने कहा कि सरकार को इस फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए. हर किसी को बोलने का मौका मिलना चाहिए.
उन्होंने कहा कि संसद में जो सवाल हमने उठाए थे वे लोगों से संबंधित हैं. साथ ही, इन सवालों को देश के सभी हिस्सों के सदस्यों ने उठाया था. उन्होंने यह भी कहा कि सदन की गरिमा को ध्यान में रखते हुए, सरकार को निलंबन वापस लेना चाहिए.
अरुण जेटली ने भी दिया था सदन के वेल में धरना
अपने प्रदर्शन को सही ठहराते हुए उन्होंने कहा कि जब बीजेपी विपक्ष में थी, तो 2013 में स्वर्गीय अरुण जेटली ने खुद सदन के वेल में धरना दिया था. यह तो सदस्यों का लोकतांत्रिक अधिकार है.
बीमा बिल बिना किसी नोटिस के लाया गया, तो जाहिर तौर पर विपक्ष ने इसका विरोध किया. लेकिन अगर आप देखें, तो ऐसा लग रहा था कि सब कुछ पूर्व नियोजित था. मार्शल को बैठाया गया था. कभी सोचा नहीं था कि इस तरह की कड़ी कार्रवाई की जाएगी. निलंबन को इसी सत्र में निरस्त किया जाना चाहिए.
आपको बता दें कि इस निलंबन को गैरकानूनी बताते हुए विपक्ष ने शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन राज्यसभा से वॉकआउट कर दिया. इसके बाद विपक्षी नेताओं ने राज्यसभा अध्यक्ष वेंकैया नायडू के साथ मुलाकात कर निलंबन वापस लेने की अपील की. इस दौरान उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने साफ कर दिया कि बिना माफी के निलंबन वापस नहीं होगा.
कमलेश सिंह