यूपी के सोनभद्र जिले के रहने वाले रामबाबू सुर्खियों में हैं. 23 साल के रामबाबू मजदूरी भी कर चुके हैं. हाल ही में उन्होंने राष्ट्रीय खेलों (National Games) में 35 किलोमीटर की पुरुष 'रेस वॉक' (Race Walk) में गोल्ड मेडल जीता है. इसी बीच उनकी मजदूरी करने की कुछ तस्वीरें भी वायरल हो रही हैं.
रामबाबू को कोविड लॉकडाउन के दौरान दो वक्त के खाने के लिए संघर्ष करना पड़ा था. इस दौरान उन्होंने मनरेगा (MNREGA) के तहत मिट्टी खुदाई का काम किया था. इससे पहले वे वेटर का काम भी कर चुके थे. इसके अलावा उन्होंने एक कुरियर पैकेजिंग कंपनी में करीब 4 महीने बोरे को सिलने का काम किया था.
उनके पिता एक भूमिहीन मजदूर हैं, जो मज़दूरी करके अपने परिवार का पेट पालते हैं. रामबाबू कहते हैं कि उनके पिता मजदूरी करके किसी तरह उनकी ट्रेनिंग और बहन की पढ़ाई और का खर्च उठा पाते हैं.
बकौल रामबाबू, आर्थिक अच्छी नहीं होने के कारण मैंने कभी अच्छी डाइट नहीं ली. पानी लाने तक के लिए हमें एक किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है.
उस कठिन दौर को याद करते हुए रामबाबू BBC से कहते हैं- परिवार की आर्थिक हालत अच्छी नहीं है. लॉकडाउन में कोई काम था नहीं तो जिंदा रहने के लिए पिता के साथ डेढ़ महीने तक मनरेगा में मजदूरी की. लेकिन पूरा भरोसा था कि एक दिन देश के लिए जरूर परफ़ॉर्म करूंगा.
अब अपने दृढ़ निश्चय और लगन के बलबूते रामबाबू ने 2 घंटे 36 मिनट और 34 सेकेंड में 'रेस वॉक' पूरी कर नेशनल रिकॉर्ड अपने नाम कर कर लिया है. हालांकि, रामबाबू यहीं नहीं रुकने वाले. उनका सपना ओलंपिक में जाने का है.
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