RSS की दशहरा रैली से क्या सियासी संकेत मिले?

RSS प्रमुख मोहन भागवत के दशहरा रैली सम्बोधन में नया क्या, मिज़ोरम के सीएम को पीएम मोदी से क्या दिक्कत है, MP में उम्मीदवारों की नाराज़गी को कैसे संभालेगी कांग्रेस और बीजेपी, दिल्ली में प्रदूषण और डेंगू से कैसे बचें, सुनिए 'दिन भर' में.

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शुभम तिवारी

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  • 24 अक्टूबर 2023,
  • अपडेटेड 7:36 PM IST

मौजूदा भारतीय राजनीति और सत्ता के जो कुछ एक महत्वपूर्ण केंद्र हैं. उनमें एक है नागपुर का संघ मुख्यालय. दशहरे के दिन यहां ख़ास उत्साह और चहल-पहल रहती है. आज भी शस्त्र पूजा कार्यक्रम के समय माहौल ऐसा ही था. रवायत के मुताबिक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने अपने कार्यकर्ताओं और इस बहाने देश को संबोधित किया. संघ प्रमुख ने अपने संबोधन में मणिपुर हिंसा, लोकसभा चुनाव, अयोध्या में राम मंदिर के उद्घाटन के अलावा और कई चीज़ों पर विस्तार से अपनी बात रखी. संघ के इस उत्सव में मुख्य अतिथि आज गीतकार और संगीतकार शंकर महादेवन थे. उनके अलावा, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस भी कार्यक्रम में पहुंचे हुए थे. पिछली बार दशहरा रैली की बड़ी चर्चा हुई थी. क्योंकि मुख्य अतिथि के रूप में जानी-मानी माउंटेनियर और दो बार एवरेस्ट फतह कर चुकीं संतोष यादव को संघ ने मंच दिया था. करीब सौ वर्षों के संघ के इतिहास में यह पहला मौका था जब दशहरा रैली में चीफ गेस्ट के रूप में किसी महिला को बुलाया गया था. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की दशहरा रैली और इसमें दिए जाने वाले संघ प्रमुख के भाषण पर देश दुनिया की नजर रहती है. क्योंकि इसमें संघ की नीतियों और देश के प्रति जो उनका विज़न, दृष्टिकोण है. उसकी झलक मिलती है. आज की झलकियां क्या थीं, संघ प्रमुख के सम्बोधन की नोट करने वाली बातें क्या रहीं, सुनिए 'दिन भर' में. 

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चुनाव सिर्फ़ राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, तेलांगाना में नहीं हो रहें हैं. उत्तर पूर्वी राज्य मिज़ोरम में तो अब गिनती के दो हफ़्ते वोटिंग के बच गए हैं. 7 नवंबर को यहां मतदान होना है लेकिन चर्चाएं इसकी अब तक थोड़ी कम थी. मगर कल यहां के मुख्यमंत्री ज़ोरमथंगा ने एक बयान देकर सर्द माहौल में राजनीति तपिश बढ़ा दी. उन्होंने कहा कि चुनावों के प्रचार करने जब पीएम मोदी मिज़ोरम आएंगे तो वे उनके साथ स्टेज शेयर नहीं करेंगे. 30 अक्टूबर को पीएम मोदी पश्चिम मिजोरम के मामित गांव में भाजपा कैंडिडेट्स के समर्थन में रैली के लिए जा सकते हैं. जोरमथंगा की पार्टी मिजो नेशनल फ्रंट भाजपा के नेतृत्व वाली नॉर्थ ईस्ट डेमोक्रेटिक अलायंस और केंद्र में एनडीए में शामिल है. हालांकि, मिजो नेशनल फ्रंट मिजोरम में भाजपा से अलग है. आख़िर क्यों ज़ोरमथंगा प्रधानमंत्री के साथ स्टेज शेयर करने से क़तरा रहे हैं, इसके पीछे घरेलू राजनीति है या कुछ और भी, सुनिए 'दिन भर' में. 

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देश के एकदम केंद्र में है राज्य मध्यप्रदेश. जैसा हमने बताया था, मिज़ोरम के अलावा वहां भी अगले महीने वोटिंग है. यहां मिज़ोरम की तरह त्रिकोणीय मुकाबला नहीं. मामला यहां दोतरफ़ा है. एक ओर भारतीय जनता पार्टी है और सामने उसके ज़ोर आज़माइश कर रही है कांग्रेस भाजपा पहले ही 18 साल की सत्ता-विरोधी लहर से हलकान है. ऊपर से उम्मीदवारों के ऐलान के बाद बग़ावत ने पार्टी की चिंताएं बढ़ा दी हैं. लेकिन बग़ावत सिर्फ़ बीजेपी में नहीं, कांग्रेस में भी कई लोगों के नाराज़गी की ख़बरें हैं. लेकिन दोनों पार्टियों ने इसका एक दिलचस्प काट ढूंढ निकाला है. कांग्रेस ने बीजेपी के कम से कम 7 बागियों को अपना टिकट देकर बढ़त ले ली है. वहीं, बीजेपी ने भी कई कांग्रेस नेताओं को पार्टी में शामिल करा कर टिकट दिया है. अभी तक कांग्रेस के 4 बागी प्रत्य़ाशियों को बीजेपी का टिकट मिल गया है. दोनों पार्टियां इन बाग़ियों का इस्तेमाल किस तरह ले रही हैं और यह इन पार्टियों की रणनीति या मजबूरी, सुनिए 'दिन भर' में. 

सर्दियां शुरु होते ही, शुरु हो जाती है चिंता प्रदूषण और मच्छरों की. कुछ साल पहले तक ये चिंता दिवाली के बाद सताती थी. लेकिन अब तो अक्टूबर ही से आबोहवा बिगड़ने लगी है. दिल्ली में कल AQI 306 तल पहुंच गया. 27 अक्टूबर को दिल्ली नगर निगम इस मामले को लेकर एक बैठक भी करने वाली है. सुगबुगाहटें है कि इस मीटिंग में गाड़ियों की पार्किंग फीस बढ़ाएँ जाने पर भी विचार किया जा सकता है. लेकिन दिल्लीवासियों के लिए यह इकलौती समस्या नहीं. डेंगू की वजह से भी लोगों का जनजीवन बेहाल है. दिल्ली में 1 जनवरी से अब तक डेंगू के कुल 4,965 मामले दर्ज हुए हैं. बीते हफ्ते अकेले 525 मामले डेंगू के दर्ज हुए. हालांकि, दिल्ली नगर निगम के एमएचओ ललन वर्मा का मानना है कि दिल्ली में डेंगू अभी भी कंट्रोल में है. राजधानी पर प्रदूषण और डेंगू की पड़ती दोहरी मार का ग्राउन्ड पर क्या असर है, सुनिए 'दिन भर' में.

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