सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को पंजाब सरकार को 70 वर्षीय किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल, जो अनिश्चितकालीन अनशन पर हैं, को स्वास्थ्य जांच के लिए मनाने का निर्देश दिया. अदालत ने पंजाब सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि बिना किसी चिकित्सा परीक्षण के दलेवाल की स्वास्थ्य स्थिति को "ठीक" कैसे बताया जा सकता है.
जस्टिस सूर्यकांत और उज्जल भुयान की पीठ ने कहा कि किसी का विरोध प्रदर्शन खत्म कराने का इरादा नहीं है, बल्कि केवल दलेवाल की सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है. अदालत ने उन्हें "जन नेता" करार देते हुए कहा, "सिविल अधिकार कार्यकर्ता इरोम शर्मिला ने भी वर्षों तक मेडिकल देखरेख में अपना विरोध जारी रखा. इसी तरह, डल्लेवाल भी मेडिकल देखरेख में अपना विरोध जारी रख सकते हैं."
कोर्ट ने दिए ये निर्देश
पीठ ने पंजाब सरकार के डॉक्टरों की ओर से डल्लेवाल की सेहत को "ठीक" बताने पर सवाल उठाते हुए पूछा, "21 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे और कई बीमारियों से जूझ रहे 70 वर्षीय व्यक्ति की सेहत कैसे ठीक हो सकती है? क्या आपने उनका ब्लड टेस्ट, ईसीजी और अन्य जरूरी जांचें की हैं?" जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि अदालत डल्लेवाल से बातचीत करेगी, लेकिन पहले यह सुनिश्चित करना होगा कि उनकी हालत सुरक्षित है.
अदालत में क्या बोली पंजाब सरकार
पंजाब सरकार ने अदालत को बताया कि डल्लेवाल ने खुद अदालत को संबोधित करने की इच्छा व्यक्त की है. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब के एडवोकेट जनरल गुरमिंदर सिंह को निर्देश दिया कि वे दलेवाल को कम से कम एक हफ्ते के लिए चिकित्सा उपचार लेने के लिए मनाएं. एडवोकेट जनरल ने डल्लेवाल को मनाने के लिए एक दिन का समय मांगा और अदालत की भावना से उन्हें अवगत कराने का आश्वासन दिया. अदालत ने मामले की सुनवाई अब 20 दिसंबर को तय की है.
26 नवंबर से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर जगजीत सिंह डल्लेवाल
जगजीत सिंह डल्लेवाल 26 नवंबर से पंजाब-हरियाणा के खनौरी बॉर्डर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं. उनकी मांगों में फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी शामिल है. किसान संगठन संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) और किसान मजदूर मोर्चा के बैनर तले किसान 13 फरवरी से शंभू और खनौरी बॉर्डर पर धरना दे रहे हैं. उनका दिल्ली कूच रोकने के लिए हरियाणा सरकार ने अंबाला-नई दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग पर बैरिकेड्स लगाए थे.
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