'नामीबिया वाला चीता सबको बोल रहा था- क्या मैं तुम्हें खा सकता हूं', फॉरेस्ट मिनिस्ट्री का Funny Tweet

नामीबिया से चीते लाकर अब केंद्र और मध्य प्रदेश सरकार ईको टूरिज्म को बढ़ावा देने में जुट गई है. कूनो नेशनल पार्क में छोड़े गए चीतों को देखने के लिए कुछ महीने का इंतजार जरूर करना होगा, लेकिन सोशल मीडिया पर खास मेहमानों की मौजूदगी दिखाने का प्रयास अभी से जारी है.

Advertisement
चीतों को लेकर मिनिस्ट्री का ट्वीट.  चीतों को लेकर मिनिस्ट्री का ट्वीट.

aajtak.in

  • श्योपुर/नई दिल्ली,
  • 20 सितंबर 2022,
  • अपडेटेड 3:30 PM IST

मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में नामीबिया से चीते लाकर सरकार अब ईको टूरिज्म को बढ़ावा देने में जुट गई है. भारत सरकार का पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय इसको लेकर लगातार पहल करने में जुटा है. चीतों को लेकर हाल ही में मंत्रालय ने एक मजेदार कैप्शन के साथ फोटो शेयर किया है. जिसे ट्विटर यूजर्स चटकारे ले-लेकर शेयर कर रहे हैं. 

Advertisement

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEF&CC) ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से दो बंदरों की तस्वीर शेयर की है. साथ ही लिखा है- ''नामीबिया वाला चीता है न, वो कल सबको बोल रहा था कि क्या मैं तुम्हें खा सकता हूं!!'' 

Tweet से पता चलता है कि बंदर अपने बच्चे को चीतों को दिखाते हुए उसी तरह डरा रहा है, जिस तरह लोग अपने मासूम बच्चों को किसी का भय दिखाकर कुछ न कुछ काम करा लेते हैं या उन्हें अनुशासन सिखाते हैं. 

MoEF&CC के इस फनी ट्वीट को 131 से अधिक बार रिट्वीट किया जा चुका है और 1250 से ज्यादा लाइक मिल चुके हैं. यही नहीं, यूजर्स इस ट्वीट पर एक से एक मजेदार रिप्लाई दे रहे हैं.

पता हो कि 1952 में भारत से विलुप्त हो चुके जंगली चीतों को नामीबिया से लोकर मध्य प्रदेश स्थित श्योपुर जिले के कूनो नेशनल पार्क  में छोड़ा गया है. यह मांसाहारी बड़े जंगली जानवरों के अंतर-महाद्वीपीय स्थानांतरण की दुनिया की पहली परियोजना है. इन आठ चीतों में से 5 मादा और 3 नर हैं. 

Advertisement

सरकार की मानें तो चीते खुले जंगल और चरागाहों के इकोसिस्टम को बहाल करने में मदद करेंगे. इससे जैव विविधता के संरक्षण में मदद मिलेगी और यह जल सुरक्षा, कार्बन पृथक्करण और मृदा की नमी के संरक्षण जैसी इकोसिस्टम से जुड़ी सेवाओं को बढ़ाने में मदद करेंगे.

यही नहीं, चीतों के आने से बड़े पैमाने पर समाज को लाभ होगा. दरअसल, इन जंगली जानवरों के आने से पर्यावरण के अनुकूल विकास और इकोटूरिज्म की गतिविधियों के जरिए स्थानीय लोगों के रोजगार के अवसरों में इजाफा करेगा.

 

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement