दिल्ली हाईकोर्ट सीवर में हुई मौतों को लेकर सख्त हो गया है. अदालत ने दिल्ली के मुंडका में सीवर के भीतर जहरीली गैस की वजह से मारे गए दो युवकों के परिवारों को अब तक मुआवजा नहीं देने पर दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) को फटकार लगाई. अदालत ने डीडीए को निर्देश दिया कि वह मारे गए युवकों के परिवार वालों को 10-10 लाख रुपये का मुआवजा दें.
अदालत का यह आदेश सिर पर मैला ढोने की प्रथा से जुड़े एक मामले पर स्वत: संज्ञान लेने से संबंधित एक मामले की सुनवाई के दौरान आया. दरअसल मुंडका इलाके में दो कर्मचारी सीवर की सफाई के लिए गए थे लेकिन सीवर में जहरीली गैस की वजह से दम घुटने से उनकी मौत हो गई थी.
सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की अध्यक्षता में पीठ ने उचित कार्रवाई नहीं करने और पीड़ितों को अब तक मुआवजा नहीं दिए जाने को लेकर डीडीए को फटकार लगाई.
मामले में डीडीए की ओर से पेश वकील ने बताया कि इस मामले में शामिल लोगों को निजी तौर पर हायर किया गया था इसलिए सच्चाई का पता लगाना मुश्किल है.
इस पर पीठ ने कहा, यह आपके कठोर रवैये की अति है. हम एक के बाद एक समितियों का गठन नहीं करते रहेंगे. इससे कुछ नहीं होगा.
पीठ ने कहा, यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि आजादी के 75 साल बाद भी गरीब लोगों को मैला ढोने का काम करने के लिए मजबूर होना पड़ता है.
अदालत ने पीड़ितों को मुआवजा दिए जाने के अलावा डीडीए से यह भी कहा कि वह सफाई कर्मचारी आंदोलन केस में सुप्रीम कोर्ट के 2014 के फैसले के संबंध में अनुकंपा नियुक्ति के लिए मृतकों के परिवार वालों के दावों पर भी विचार करें.
पीठ ने डीडीए को 30 दिनों के भीतर नियुक्ति के अपने फैसले से अवगत कराने का निर्देश दिया. अदालत ने कहा कि अगर तय समयसीमा के भीतर उनके निर्देशों का पालन नहीं किया जाएगा तो मामले की अगली सुनवाई (14 नवंबर) को डीडीए के उपाध्यक्ष को पेश होना होगा.
बता दें कि मुंडका में सीवर की सफाई के दौरान रोहित और अशोक कुमार की मौत हो गई थी. रोहित डीडीए में स्वीपर और अशोक सिक्योरिटी गार्ड के तौर पर काम करते थे.
कनु सारदा