अरुणाचल प्रदेश से चीन की सनक का इतिहास: दिन भर, 13 दिसंबर

अरुणाचल प्रदेश में भारत और चीन के सैनिकों के बीच झड़प पर सरकार की तरफ से स्टेटमेंट आ गया है. लेकिन इस बयान से क्या बातें अब तक साफ़ नहीं हुई हैं और यांग्त्से की सेटेलाइट इमेज में क्या दिख रहा है? इंडिया और चाइना की जो पुरानी अदावत रही है, उसकी जड़ें अरुणाचल में क्यों है? आम आदमी पार्टी ने संदीप पाठक को ऑर्गेनाईजेशन में बड़ी ज़िम्मेदारी क्यों दी और फ़ीफ़ा वर्ल्ड कप के पहले सेमीफाइनल में किसका पलड़ा भारी है, सुनिए आज के 'दिनभर' में कुलदीप मिश्र से.

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कुमार केशव / Kumar Keshav

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  • 13 दिसंबर 2022,
  • अपडेटेड 8:48 PM IST

पिछले कुछ साल में भारत और चीन के बीच सीमा विवाद पर टकराव होता रहा है. दो साल पहले ईस्ट लद्दाख की गलवान घाटी में दोनों देशों के सैनिकों की हिंसक भिड़ंत हुई थी. उस घटना के बाद दोनों देशों के बीच रिश्ते काफी तनावपूर्ण रहे हैं. इस टेंशन को कम करने के लिए दोनों मुल्कों के बीच कमांडर और डिप्लोमेटिक लेवल पर लगातार बातचीत जारी है. इस बीच अभी चार दिन पहले 9 दिसंबर को अरुणाचल प्रदेश में तवांग सेक्टर के यांग्त्से इलाक़े में भारत और चीन के सैनिकों की एक बार फिर झड़प हो गई. इस झड़प पर रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने आज संसद के दोनों सदनों में जवाब दिया. उन्होंने कहा कि चीनी सैनिकों ने तवांग सेक्टर के यांग्त्से इलाक़े में, LAC पर अतिक्रमण कर स्टेटस क्वो यानि यथास्थिति को एकतरफ़ा बदलने का प्रयास किया था लेकिन भारतीय सैनिकों ने इसे नाकाम कर दिया.  

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वहीं संसद में विपक्ष इस घटना पर चर्चा की मांग करता रहा. लोकसभा में राजनाथ सिंह जब बयान दे रहे थे तो लीडर ऑफ ऑपोजिशन अधीर रंजन चौधरी ने कुछ कहने की कोशिश की, लेकिन स्पीकर ने उन्हें रोक दिया, रक्षा मंत्री के बयान पर कोई काउंटर क्वेश्चन नहीं करने दिया. जिसके बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे समेत विपक्षी नेताओं ने सदन की कार्यवाही से वॉकआउट कर दिया. लेकिन सरकार के खिलाफ आक्रामक विपक्ष को गृहमंत्री अमित शाह ने भी घेरा. 

तवांग में चीनी सेना की दाल क्यों नहीं गली

तो यांग्त्से इलाक़े में जो झड़प हुई उस पर सरकार और विपक्ष आमने सामने है. लेकिन ये झड़प क्यों हुई, इस इलाक़े में घुसपैठ क्यों करना चाहता है चीन? रक्षा मंत्री के बयान में बारीक़ ब्यौरे क्यों नहीं थे? चीन की तरफ से क्या रिएक्शन सामने आया है, क्या अपने आंतरिक मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए चीन LAC पर तनाव बढ़ा रहा है? साथ ही यांग्त्से इलाक़े की सेटेलाइट तस्वीरें क्या कहानी बयां करती है, सुनिए 'दिन भर' की पहली ख़बर में.

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अरुणाचल को लेकर चीन का दावा क्या है

इंडिया-चाइना बॉर्डर, जिसे लाइन ऑफ़ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) कहते हैं, वो मोटा मोटी तीन भाग में बंटा है. लद्दाख वाले पार्ट को वेस्टर्न सेक्टर कहते हैं, हिमाचल प्रदेश के पोरशन को सेंट्रल सेक्टर और फिर अरुणाचल प्रदेश का हिस्सा आता है जिसे इस्टर्न सेक्टर कहा जाता है. ये वही पार्ट है जहां 9 दिसंबर को भारत-चीन की सेनाओं के बीच टकराव हुआ. लेकिन ये पहली दफा नहीं है जब अरुणाचल में इस तरह की घटना हुई है. 

लेकिन इन सब की शुरुआत हुई थी जब चीन ने तिब्बत पर कब्ज़ा किया था जिसकी सीमा भारत से सटी हुई थी और इसके बाद से ही चीन अरूणाचल प्रदेश को दक्षिणी तिब्बत बताने लगा था.  भारत हर बार चीन के दावे का सख़्ती से खंडन किया है. पिछले साल दिसंबर महीने में चीन ने अरुणाचल प्रदेश के 15 स्थानों के लिए चीनी, तिब्बती और रोमन में नए नामों की लिस्ट जारी की थी. भारत के विदेश मंत्रालय ने चीन के इस क़दम पर कड़ी आपत्ति जताई थी और कहा था कि अरुणाचल प्रदेश हमेशा से भारत का अभिन्न अंग रहा है और आगे भी रहेगा. लेकिन इस विवाद की पूरी कहानी है क्या और इसमें ब्रिटिशर्स का क्या रोल रहा? अरूणाचल के मैक्मोहन लाइन को मान्यता देने पर दोनों देशों के बीच कोई पॉजिटिव बातचीत हुई या नहीं और अरुणाचल से सटा जो एरिया है चीन का उस ओर उसने क्या क्या डेवलपमेंट कर रखे हैं, सुनिए 'दिन भर' की दूसरी ख़बर में.

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AAP में क्यों बढ़ा संदीप पाठक का क़द 

आम आदमी पार्टी ने संदीप पाठक को संगठन का राष्ट्रीय महासचिव अपॉइंट किया है. एक तरह से पार्टी के संगठन में संयोजक अरविंद केजरीवाल के बाद ये दूसरा सबसे बड़ा पद होगा. आईआईटी दिल्ली के पूर्व एसिस्टेंट प्रोफेसर संदीप पाठक राज्यसभा सदस्य भी हैं. आम आदमी पार्टी के थिंक टैंक कहे जाने वाले संदीप पंजाब और गुजरात में हुए विधानसभा चुनाव प्रभारी भी थे. हालांकि AAP गुजरात में ज्यादा प्रभाव नहीं डाल पाई हो, लेकिन अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में पार्टी ने 12.9 फीसदी वोट और 5 सीटें हासिल करके राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा दिलाने में कामयाब रहे. तो कौन हैं संदीप पाठक और इनका बैकग्राउंड क्या है...अचानक से आम आदमी पार्टी में पाठक का इतना बड़ा कद होना वो भी मनीष सिसोदिया और संजय सिंह की प्रेज़ेंस में, ये क्या दर्शाता है, सुनिए 'दिन भर' की तीसरी ख़बर में.

मेसी का सपना पूरा होगा?

क़तर में चल रहा फीफा वर्ल्ड कप अपने अंतिम पड़ाव में पहुँच चुका है. सिर्फ चार टीमें और तीन मैच बच रहे हैं इस टूर्नामेंट में. अर्जेंटीना, क्रोएशिया, फ़्रांस और मोरक्को ये चार टीमें हैं जिनके बीच दो सेमीफाइनल खेले जाने हैं. और इन दोनों मैच के विजेता टीमों के बीच ख़िताबी मुक़ाबला होगा. पहला सेमीफ़ाइनल  रात साढ़े बारह बजे से अर्जेंटीना और क्रोएशिया के बीच खेला जाना है. क्रोएशिया 39 लाख की आबादी वाला छोटा सा देश है, लेकिन इस टीम ने फुटबॉल के मैदान में जो जज़्बा दिखाया है, उसकी दाद देनी पड़ेगी. ये वही टीम है जिसने पिछले हफ़्ते ब्राज़ील को क्वॉर्टरफाइनल में हराया था. आज उनका सामना अर्जेंटीना से होना है. अर्जेंटीना ने महान माराडोना की अगुवाई में 36 साल पहले फ़ीफ़ा विश्व कप जीता था और फिर से उस इतिहास को दोहराने की दहलीज़ पर खड़ी है. लेकिन क्या इसके लिए वह सेमीफाइनल की जंग जीत पाएगा, इस टूर्नामेंट में कई उलटफेर कर चुका क्रोएशिया क्या एक और अपसेट कर पायेगा, सुनिए 'दिन भर' की आख़िरी ख़बर में.
 

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