भंडारकर इंस्टीट्यूट में तोड़फोड़ के मामले में संभाजी ब्रिगेड के 68 कार्यकर्ता बरी

पुणे जिला अदालत ने संभाजी ब्रिगेड नामक हिंदुत्ववादी संगठन के 68 आरोपियों को निर्दोष करार देते हुए बरी कर दिया है.

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फोटो: भंडारकर संस्थान की वेबसाइट से साभार फोटो: भंडारकर संस्थान की वेबसाइट से साभार

पंकज खेळकर

  • पुणे,
  • 28 अक्टूबर 2017,
  • अपडेटेड 6:20 AM IST

भंडारकर प्राच्यविद्या संस्था पर साल 2004 में हुए तोड़फोड़ के मामले में पुणे जिला अदालत ने संभाजी ब्रिगेड नामक हिंदुत्ववादी संगठन के 68 आरोपियों को निर्दोष करार देते हुए बरी कर दिया है.

पुणे के लॉ कॉलेज रोड पर स्थित भंडारकर प्राच्यविद्या संस्था पर जनवरी 2004 में संभाजी ब्रिगेड के तक़रीबन 100 कार्यकर्ताओं ने तोड़फोड़ की थी. मामला था अमेरिकन लेखक जेम्स लेन का. असल में इन्होंने छत्रपति शिवाजी महाराज के चरित्र पर लिखी किताब 'शिवाजी हिन्दू किंग इन इस्लामिक इंडिया' में छत्रपति शिवाजी महाराज, राजमाता जिजाऊ के बारे में कुछ विवादास्पद बातें लिखी थीं.

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किताब के कुछ पन्ने लिखने में मदद करने के आरोप में भंडारकर संशोधन संस्थान के इतिहासकारों पर तीव्र नाराजगी जताते हुए उन इतिहासकारों के साथ मारपीट के साथ ही संस्था में जमकर तोड़फोड़ की गई थी. संभाजी ब्रिगेड कार्यकर्ता अजय भोसले ने आजतक को बताया कि सबूतों के अभाव में और दोनों चार्जशीट में असमानता  होने के कारण संभाजी ब्रिगेड के सभी 68 कार्यकर्तोओं को बरी कर दिया है.  

गौरतलब है कि अपनी वीरता से शक्तिशाली मुगलों को घुटने टेकने पर मजबूर करने वाले सम्राट छत्रपति शिवाजी न सिर्फ एक महान शासक थे, बल्किक दयालु योद्धा भी थे. वीर योद्धा होने के साथ-साथ वो सैन्य रणनीतिकार भी थे. गुरिल्ला युद्ध की नई तकनीक सिखाने वाले शिवाजी महाराज ही थे. 343 साल पहले 6 जून 1674 को उनका राज्याभिषेक हुआ था.

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