मध्य प्रदेश में स्वास्थ्य सेवा बदहाल, अब राजगढ़ में मरीजों को फर्श पर लिटाया

विदिशा के ग्यासपुर और छतरपुर के बाद अब राजगढ़ जिले से स्वास्थ्य सेवा की बदहाली की तस्वीर सामने आई है. नसबंदी के बाद महिलाओं को अस्पताल की सफाई के नाम पर खुले आसमान के नीचे जमीन पर लिटा दिया गया. जिलाधिकारी ने इसे लापरवाही बताते हुए सीएमएचओ से रिपोर्ट तलब की है.

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जमीन पर लेटे मरीज जमीन पर लेटे मरीज

रवीश पाल सिंह

  • राजगढ़,
  • 03 दिसंबर 2019,
  • अपडेटेड 10:23 AM IST

  • जिलाधिकारी ने मानी लापरवाही
  • सीएमएचओ से तलब की रिपोर्ट

मध्य प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल हैं. कमलनाथ सरकार एक तरफ बेहतरी का दावा कर रही है, वहीं दूसरी तरफ जिलों के अस्पतालों से आ रही तस्वीरें इनकी पोल खोल रही हैं. पहले विदिशा के ग्यासपुर और छतरपुर के बाद अब राजगढ़ जिले से स्वास्थ्य सेवा की बदहाली की तस्वीर सामने आई है. नसबंदी के बाद महिलाओं को अस्पताल की सफाई के नाम पर खुले आसमान के नीचे जमीन पर लिटा दिया गया. जिलाधिकारी ने इसे लापरवाही बताते हुए सीएमएचओ से रिपोर्ट तलब की है.

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राजगढ़ के कुरावर के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में कुछ महिलाएं नसबंदी का ऑपरेशन करवाने आई थीं. ऑपरेशन के बाद महिलाओं को अस्पताल की सफाई करने के नाम पर तेज ठंड में वार्ड से बाहर कर दिया गया. महिलाओं को खुले आसमान के नीचे जमीन पर लिटा दिया गया, जहां मरीज और उनके परिजन ठंड से ठिठुरते रहे. परिजनों ने आरोप लगाया है कि उन्हें बेड तक नहीं दिया गया जिस कारण उन्हें जमीन पर लेटना पड़ा. राजगढ़ की जिलाधिकारी निधि निवेदिता ने इसे लापरवाही माना है.

जिलाधिकारी ने कहा कि मामले की जांच कराई जाएगी. उन्होंने कहा कि दोषी कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. इसके लिए सीएमएचओ से रिपोर्ट भी मंगवाई जाएगी. गौरतलब है कि ऑपरेशन के बाद मरीज का बिस्तर जमीन पर लगाने से संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है. इसकी वजह यह होती है कि मरीज धूल- मिट्टी के संपर्क में आसानी से आ जाता है. ऑपरेशन के बाद मरीजों को बेड पर ही रखने की स्पष्ट गाइडलाइन भी है. नसबंदी के 24 घंटे बाद डॉक्टर मरीज की जांच करता है और हालत से पूरी तरह संतुष्ट होने पर मरीज को घर भेज दिया जाता है.

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बता दें कि मध्य प्रदेश में पिछले कुछ दिनों से सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली की तस्वीरें लगातार सामने आ रही हैं. विदिशा और छतरपुर में भी नसबंदी के बाद महिलाओं को जमीन पर लिटा दिया गया था, वहीं नागदा में मोबाइल की लाइट में इंजेक्शन दिए जाने की तस्वीरें भी आई थीं. इमरजेंसी लाइट के प्रकाश में नसबंदी की गई थी. इन सभी मामलों ने भी तूल पकड़ा, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई. अब हालिया तस्वीरों पर जिलाधिकारी ने कार्रवाई की बात कही है.

(पंकज शर्मा के इनपुट के साथ)

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