MP: छतरपुर में भी विदिशा जैसा हाल, नसबंदी के बाद महिलाओं को जमीन पर लेटाया

मध्य प्रदेश में सरकारी अस्पतालों से लापरवाही की लगातार खबरें आ रही हैं. हाल ही में विदिशा के ग्यारसपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में नसबंदी के बाद महिलाओं को जमीन पर लेटाने का मामला ठंडा भी नहीं पड़ा था कि छतरपुर से भी ऐसा ही एक मामला सामने आया है.

Advertisement
नसबंदी के बाद जमीन पर लेटीं महिलाएं (Photo- Aajtak) नसबंदी के बाद जमीन पर लेटीं महिलाएं (Photo- Aajtak)

रवीश पाल सिंह

  • छतरपुर,
  • 01 दिसंबर 2019,
  • अपडेटेड 12:34 AM IST

  • मध्य प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में बरती जा रही लापरवाही
  • नसबंदी ऑपरेशन के बाद महिलाओं को बेड नहीं दिया गया

मध्य प्रदेश में सरकारी अस्पतालों से लापरवाही की लगातार खबरें आ रही हैं. हाल ही में विदिशा के ग्यारसपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में नसबंदी के बाद महिलाओं को जमीन पर लेटाने का मामला ठंडा भी नहीं पड़ा था कि छतरपुर से भी ऐसा ही एक मामला सामने आया है.

Advertisement

छतरपुर के जिला अस्पताल में महिलाओं को नसबंदी ऑपरेशन के बाद पलंग तक नहीं मिला और महिलाओं को ठंड के इस मौसम में जमीन पर ही लेटा दिया गया. सिर्फ यही नहीं, इलाज के बाद उन्हें स्ट्रेचर तक नहीं मिला, जिसकी वजह से उनके परिजन उन्हें हाथों में उठाकर बाहर लाए. जमीन पर ऐसे लेटाने से महिलाओं को इंफेक्शन का खतरा भी था.

एम्बुलेंस भी मुहैया नहीं कराई गई

नसबंदी करवाने आईं महिलाओं को एम्बुलेंस तक मुहैया नहीं कराई गई और वो खुद के खर्चे से ही अस्पताल आईं. सिविल सर्जन आर.एस. त्रिपाठी ने आजतक से बात करते हुए बताया कि उन्हें घटना की जानकारी खुद मीडिया के माध्यम से मिली है. उन्होंने इस मामले को दिखाने का आश्वासन दिया. वहीं, महिलाओं के परिजनों ने अस्पताल में फैली अव्यवस्था पर नाराजगी जताई और बताया कि सरकारी अस्पतालों में व्यवस्था सरकार बदलने के बाद भी नहीं सुधरी है.

Advertisement

बता दें कि हाल ही में विदिशा में भी इसी तरह का मामला सामने आया था जहां ग्यारसपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में करीब 41 महिलाओं को नसबंदी के बाद जमीन पर लेटा दिया गया था. वहीं नागदा में नसबंदी के इलाज के दौरान लाइट चली जाने के बाद मोबाइल की लाइट में महिलाओं को इंजेक्शन लगाए गए थे और इमरजेंसी लाइट में ऑपरेशन किए गए थे.

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement